केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का उद्देश्य घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाकर बिजली बिल में राहत देना है, लेकिन कई क्षेत्रों में इसकी रफ्तार अपेक्षा से धीमी नजर आ रही है। ताजा आंकड़ों के अनुसार अब तक केवल 687 घरों में ही सोलर पैनल लगाए जा सके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि योजना के प्रचार-प्रसार की कमी और जागरूकता का अभाव इसके पीछे प्रमुख कारण हो सकते हैं।
687 घरों तक पहुंची सोलर सुविधा
सरकारी योजना के तहत लोगों को अपने घरों की छतों पर रूफटॉप सोलर पैनल लगाने के लिए सब्सिडी दी जाती है। इससे बिजली उत्पादन घर पर ही संभव होता है और उपभोक्ताओं के बिजली बिल में काफी कमी आती है।
हालांकि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अब तक केवल 687 घरों में सोलर सिस्टम स्थापित किए जा सके हैं, जो योजना के लक्ष्य की तुलना में काफी कम माने जा रहे हैं।
बिजली बिल में राहत देने वाली योजना
पीएम सूर्य घर योजना का मुख्य उद्देश्य आम लोगों को सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत उपभोक्ताओं को सोलर पैनल लगाने पर सरकार की ओर से आर्थिक सहायता मिलती है।
सोलर सिस्टम लगने के बाद घरों में बिजली उत्पादन होने से बिजली बिल में काफी राहत मिलती है और अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भी भेजी जा सकती है।
प्रचार-प्रसार की कमी बनी वजह
विशेषज्ञों और स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि योजना की धीमी प्रगति का एक बड़ा कारण पर्याप्त प्रचार-प्रसार और जागरूकता की कमी है।
कई लोगों को अभी भी योजना की प्रक्रिया, सब्सिडी और लाभ के बारे में पूरी जानकारी नहीं है, जिसके कारण आवेदन की संख्या अपेक्षा से कम रही है।
जागरूकता बढ़ाने पर जोर
ऊर्जा विभाग का कहना है कि योजना को आगे बढ़ाने के लिए जागरूकता अभियान और प्रचार गतिविधियों को तेज किया जाएगा। इसके लिए विभिन्न माध्यमों से लोगों को सोलर ऊर्जा के फायदे और योजना की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजना का प्रभावी प्रचार किया जाए तो आने वाले समय में अधिक लोग रूफटॉप सोलर सिस्टम अपनाने के लिए आगे आ सकते हैं।