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गैस संकट से गांव लौटे चूल्हे

गैस संकट के चलते गांवों में कंडे-लकड़ी की मांग बढ़ी, ग्रामीणों ने फिर चूल्हे का सहारा लिया; रसोई पर पड़ा असर।

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Author: Simran Published: 9 Apr 2026, 5:37 PM Updated: 1 Jun 2026, 10:24 PM Views: 59
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सिलेंडर की कमी और बढ़ती कीमतों से ग्रामीण इलाकों में बदली रसोई की तस्वीर

देश में बढ़ते गैस संकट का असर अब गांवों की रसोई तक पहुंच गया है। कई ग्रामीण इलाकों में एलपीजी सिलेंडर की कमी और बढ़ती कीमतों के कारण लोग फिर से पारंपरिक चूल्हे की ओर लौट रहे हैं। गांवों में कंडे, लकड़ी और कोयले की मांग अचानक बढ़ गई है। कई जगहों पर महिलाएं सुबह से ही लकड़ी और कंडे जुटाने में लगी नजर आ रही हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि गैस सिलेंडर समय पर नहीं मिल रहा है और जहां उपलब्ध है, वहां कीमत अधिक होने के कारण इसे खरीदना मुश्किल हो गया है। ऐसे में मजबूरी में लोग पुराने चूल्हे और पारंपरिक ईंधन का सहारा ले रहे हैं।

गैस सिलेंडर की कमी से बढ़ी परेशानी 🔥

ग्रामीण क्षेत्रों में एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई गांवों में गैस एजेंसियों पर लंबी कतारें लग रही हैं, लेकिन सिलेंडर सीमित संख्या में ही उपलब्ध हो रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि पहले महीने में आसानी से सिलेंडर मिल जाता था, लेकिन अब कई-कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। इससे दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है और खाना बनाने में दिक्कतें बढ़ गई हैं।

कंडे और लकड़ी की बढ़ी मांग

गैस संकट के चलते ग्रामीण इलाकों में कंडे और लकड़ी की मांग तेजी से बढ़ी है। गांवों में अब लोग खेतों और जंगलों से लकड़ी इकट्ठा कर रहे हैं। कई स्थानों पर कंडे भी ऊंचे दाम पर बिकने लगे हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले जहां कंडे आसानी से मिल जाते थे, अब उनकी कीमतों में भी बढ़ोतरी हो गई है। लकड़ी की मांग बढ़ने से कई जगहों पर इसकी कमी भी देखने को मिल रही है।

महिलाओं पर बढ़ा काम का बोझ 👩‍🌾

गैस संकट का सबसे ज्यादा असर महिलाओं पर पड़ा है। पहले गैस चूल्हे पर जल्दी खाना बन जाता था, लेकिन अब लकड़ी और कंडे के चूल्हे पर ज्यादा समय लग रहा है।

इसके अलावा महिलाओं को लकड़ी और कंडे जुटाने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है। कई गांवों में महिलाएं सुबह-सुबह जंगलों और खेतों की ओर लकड़ी इकट्ठा करने जा रही हैं।

स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा असर

विशेषज्ञों का कहना है कि पारंपरिक चूल्हे का उपयोग स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। लकड़ी और कंडे के धुएं से आंखों और सांस से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

ग्रामीण महिलाओं और बच्चों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ता है। धुएं के कारण कई लोगों को खांसी, आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी हो रही है।

ग्रामीणों ने जताई चिंता

ग्रामीणों का कहना है कि गैस संकट लंबे समय तक जारी रहा तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। कई परिवारों ने बताया कि वे मजबूरी में पुराने तरीकों से खाना बना रहे हैं।

कुछ ग्रामीणों ने बताया कि गैस की कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं, जिससे गरीब परिवारों के लिए सिलेंडर खरीदना मुश्किल हो गया है।

सरकारी योजनाओं पर असर

गांवों में उज्ज्वला योजना के तहत मिले गैस कनेक्शन का उपयोग भी कम हो गया है। कई लाभार्थियों ने बताया कि सिलेंडर महंगा होने के कारण वे इसे रिफिल नहीं करा पा रहे हैं।

इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने की कोशिशों पर भी असर पड़ा है।

स्थानीय बाजारों में बदलाव 📉

गैस संकट के कारण ग्रामीण बाजारों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है।

  • कंडे की कीमत बढ़ी
  • लकड़ी की मांग में वृद्धि
  • कोयले की बिक्री बढ़ी
  • पारंपरिक चूल्हों की मांग बढ़ी

व्यापारियों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में इन वस्तुओं की बिक्री में तेजी आई है।

प्रशासन की नजर स्थिति पर

प्रशासन ने गैस आपूर्ति को लेकर स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आपूर्ति सामान्य करने का प्रयास किया जा रहा है।

इसके साथ ही गैस एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि गैस सिलेंडर की आपूर्ति बढ़ाई जाए और कीमतों को नियंत्रित किया जाए।

लोगों का कहना है कि गैस की उपलब्धता सुनिश्चित होने से उन्हें राहत मिलेगी और वे फिर से गैस चूल्हे का उपयोग कर सकेंगे।

निष्कर्ष

गैस संकट का असर अब गांवों की रसोई तक पहुंच चुका है। सिलेंडर की कमी और बढ़ती कीमतों के कारण ग्रामीणों को फिर से पारंपरिक चूल्हे अपनाने पड़े हैं। कंडे और लकड़ी की बढ़ती मांग से यह साफ है कि ग्रामीण इलाकों में स्थिति चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है।

यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ईंधन की दिशा में किए गए प्रयासों को झटका लग सकता है। फिलहाल ग्रामीणों को उम्मीद है कि जल्द ही गैस आपूर्ति सामान्य होगी और उनकी रसोई फिर से गैस चूल्हे पर लौट सकेगी।

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Simran

Simran is a passionate journalist who reports on politics, public policy, and social issues. Her work focuses on delivering reliable news, in-depth insights, and timely updates to readers.

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