भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने एक बार फिर बिहार में कानून व्यवस्था और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस घटनाक्रम पर पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) अभयानंद की टिप्पणी ने बहस को और तेज कर दिया है।
अभयानंद ने विशेष रूप से इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया है कि घटनास्थल पर एक सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) की उपस्थिति का क्या औचित्य था।
उनकी यह टिप्पणी इस पूरे प्रकरण की जटिलता और इसमें शामिल विभिन्न एजेंसियों की भूमिका पर प्रकाश डालती है।Photo: 112 Uttar Pradesh / Pexelsयह घटना, जिसमें भरत तिवारी नामक व्यक्ति की कथित तौर पर पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई, कई अनसुलझे प्रश्न छोड़ गई है।
आमतौर पर, पुलिस मुठभेड़ों में पुलिस बल ही सीधे तौर पर शामिल होता है। ऐसे में एक प्रशासनिक अधिकारी, विशेषकर एक SDM की मौजूदगी, असामान्य मानी जा रही है।