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छत्तीसगढ़ भारत का मध्य भाग में स्थित एक नवगठित राज्य है जो अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, घने जंगलों, खनिज संपदा और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है।
राज्य का नाम "छत्तीस गढ़" (छत्तीस क़िले) से लिया गया है, जो यहाँ कभी-न-कभी अस्तित्व में रहे प्राचीन क़िलों की संख्या को दर्शाता है।
1 नवंबर 2000 को मध्य प्रदेश से अलग होकर यह भारत का 26वाँ राज्य बना।
भूगोल और जनसांख्यिकी राजधानी: रायपुर (नवीन प्रशासनिक राजधानी — नया रायपुर/अटल नगर) क्षेत्रफल: लगभग 1,35,192 वर्ग किलोमीटर — देश का 9वाँ सबसे बड़ा राज्य जनसंख्या: लगभग 2.95 करोड़ (अद्यतन अनुमान) प्रमुख भाषा: हिंदी (राजभाषा), छत्तीसगढ़ी, गोंडी, हल्बी, सरगुजिया ज़िले: 33 ज़िले स्थापना: 1 नवंबर 2000 सीमावर्ती राज्य: मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, झारखंड, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र वन क्षेत्र: राज्य का लगभग 44 प्रतिशत — देश में वन प्रतिशत के लिहाज़ से अग्रणी राज्यों में ऐतिहासिक महत्व छत्तीसगढ़ का इतिहास हज़ारों साल पुराना है और इसकी धरती अनेक प्राचीन सभ्यताओं की साक्षी रही है: दक्षिण कोसल: प्राचीन काल में यह क्षेत्र "दक्षिण कोसल" कहलाता था; रामायण में भगवान राम के वनवास की कथा से जुड़ा हुआ सरभपुरीय और सोम वंश: चौथी से नौवीं शताब्दी के बीच का काल; सिरपुर जैसे महान केंद्रों का विकास कलचुरी वंश: 10वीं से 18वीं शताब्दी तक रतनपुर और रायपुर शाखाओं का शासन; इसी काल में "छत्तीस गढ़" नाम प्रचलित हुआ मराठा और भोंसले शासन: 18वीं शताब्दी में नागपुर के भोंसले राजाओं का अधिकार ब्रिटिश काल: 1854 में अंग्रेज़ों के अधीन; 1947 तक मध्य प्रांत और बरार का हिस्सा स्वतंत्रता संग्राम: वीर नारायण सिंह — छत्तीसगढ़ के पहले शहीद, 1857 की क्रांति में सक्रिय भूमिका राज्य का गठन: लंबे आंदोलन और जनभावना के बाद 1 नवंबर 2000 को मध्य प्रदेश से अलग राज्य बना संस्कृति, कला और परंपराएँ छत्तीसगढ़ की संस्कृति अपनी जनजातीय जड़ों और लोक परंपराओं के कारण अद्वितीय है: लोक नृत्य: पंथी (सतनामी समाज का प्रसिद्ध नृत्य), राउत नाचा, सुआ नृत्य, करमा, गौर नृत्य, गेड़ी लोक संगीत: पंडवानी (तीजन बाई द्वारा विश्व प्रसिद्ध), भरथरी, चंदैनी प्रमुख त्योहार: हरेली (राज्य का पहला कृषि-त्योहार), तीजा-पोरा, छेरछेरा, गोवर्धन पूजा, मड़ई मेला, बस्तर दशहरा (75 दिनों तक चलने वाला विश्व का सबसे लंबा दशहरा) व्यंजन: चीला, फरा, ठेठरी, खुरमी, बफौरी, अइरसा, दुबकी कढ़ी, बोरे-बासी, पीढ़ी हस्तशिल्प: बस्तर की ढोकरा कला (पीतल की मूर्तियाँ), लकड़ी की नक्काशी, बाँस शिल्प, टेराकोटा, कोसा सिल्क पारंपरिक वस्त्र: महिलाओं के लिए लुगड़ा (छह गज की साड़ी), पुरुषों के लिए धोती-कुर्ता जनजातीय विरासत छत्तीसगढ़ की पहचान बड़े पैमाने पर इसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति से बनती है।
राज्य की लगभग 31 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जनजाति की है।