वास्तु शास्त्र में वास्तु का महत्व: Vastuguruji Rana Sikander के अनुसार वास्तु शास्त्र भारतीय स्थापत्य और जीवनशैली से जुड़ी एक प्राचीन विद्या है, जिसका उद्देश्य घर, कार्यालय और अन्य भवनों के निर्माण एवं व्यवस्था में प्रकृति के तत्वों और दिशाओं के बीच संतुलन स्थापित करना माना जाता है।
पढ़िए पूरी खबर। वास्तु शास्त्र के मूल सिद्धांतों में पंचतत्वों—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश का सिद्धांत सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
इन पांचों तत्वों के संतुलित समन्वय से ही किसी भी भवन की ऊर्जा और वहां रहने वाले लोगों के अनुभव प्रभावित होते हैं।
राणा सिकंदर विस्तार से बताते हैं कि जब किसी भवन का निर्माण इन तत्वों के सिद्धांतों के अनुरूप होता है, तो वहां का वातावरण अधिक सुखद और व्यवस्थित महसूस होता है।
उदाहरण के लिए, जल और अग्नि के स्थानों का सही चुनाव न केवल भवन की कार्यक्षमता को बढ़ाता है, बल्कि यह वहां रहने वालों की दैनिक गतिविधियों को भी सुगम बनाता है।