अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के साथ ही भारत-अमेरिका संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ता दिख रहा है।
विशेष रूप से एक ऐसे क्षेत्र में जहां भारत पारंपरिक रूप से मध्य पूर्वी देशों पर बहुत अधिक निर्भर रहा है, वहां अब अमेरिका एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में उभर रहा है।
यह बदलाव न केवल भू-राजनीतिक समीकरणों को बदल रहा है, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता को भी मजबूत कर रहा है।Photo: Sharath G.
/ Pexelsलंबे समय से, भारत अपनी कच्चे तेल और गैस की जरूरतों के लिए सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों पर अत्यधिक निर्भर रहा है।
ये देश भारत के लिए ऊर्जा के प्रमुख आपूर्तिकर्ता रहे हैं, और इस निर्भरता ने दोनों क्षेत्रों के बीच गहरे आर्थिक और राजनीतिक संबंध स्थापित किए हैं।