ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की अंतिम यात्रा ने दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर खींचा, लेकिन सबसे ज़्यादा हैरानी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को हुई।
यह घटनाक्रम न केवल ईरान की आंतरिक शक्ति का प्रदर्शन था, बल्कि वैश्विक राजनीति में इसके गहरे निहितार्थ भी थे।
ख़ामेनेई, जिन्होंने दशकों तक ईरान का मार्गदर्शन किया, उनकी मृत्यु के बाद एक विशाल जनसमूह उनकी अंतिम यात्रा में उमड़ पड़ा, जिसने कई पश्चिमी विश्लेषकों और नेताओं को अचंभित कर दिया।Photo: Hurrah suhail / Pexelsट्रंप के लिए, ईरान हमेशा एक प्रतिद्वंद्वी शक्ति रहा है, जिसके साथ उनके कार्यकाल में तनाव चरम पर था।
ईरान पर 'अधिकतम दबाव' की नीति अपनाने वाले ट्रंप ने शायद यह उम्मीद नहीं की थी कि ख़ामेनेई की लोकप्रियता उनके निधन के बाद भी इतनी व्यापक और गहरी होगी।
अंतिम यात्रा में लाखों लोगों की भीड़ ने यह स्पष्ट कर दिया कि ख़ामेनेई केवल एक धार्मिक नेता नहीं थे, बल्कि वह ईरानी राष्ट्रवाद और पहचान के एक शक्तिशाली प्रतीक भी थे।ईरान की आंतरिक शक्ति का प्रदर्शनअंतिम यात्रा की भीड़ ने ईरान के भीतर ख़ामेनेई के प्रभाव की गहराई को उजागर किया।