साइबर ठगी में पैसा बचने की सबसे बड़ी शर्त है — तुरंत रिपोर्ट। पहले 30–60 मिनट को "गोल्डन ऑवर" कहा जाता है, जिसमें राशि फ्रीज़ होने की संभावना सबसे ज़्यादा होती है।
तुरंत ये 4 कदम
- 1930 पर कॉल करें — राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन; ट्रांज़ैक्शन डिटेल तैयार रखें
- cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें और शिकायत संख्या सुरक्षित रखें
- अपने बैंक के कस्टमर केयर पर कार्ड/UPI ब्लॉक कराएँ
- ठग से आए SMS/नंबर/स्क्रीनशॉट डिलीट न करें — यही सबूत हैं
किन बातों से बचें
- "रिफंड दिलाने" का दावा करने वाले फर्ज़ी हेल्पलाइन नंबरों से — गूगल से निकले नंबर अक्सर ठगों के होते हैं
- OTP, PIN, CVV किसी को न बताएं — बैंक कभी नहीं मांगता
- स्क्रीन-शेयरिंग ऐप (AnyDesk आदि) अनजान के कहने पर न डालें
आगे की प्रक्रिया
शिकायत के बाद साइबर सेल जांच करती है; फ्रीज़ हुई राशि कोर्ट/बैंक प्रक्रिया से वापस मिलती है। स्थानीय थाने में FIR भी दर्ज कराएँ — बीमा/बैंक विवाद में काम आती है।