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RTE में लापरवाही, 6000 बच्चों के दाखिले अटके

RTE में बड़ी लापरवाही से 6000 से ज्यादा बच्चों के दाखिले नहीं हो पाए, 33 जिलों में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल।

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Author: Simran Published: 28 Mar 2026, 3:24 PM Updated: 4 Jul 2026, 4:49 PM Views: 118
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शिक्षा के अधिकार कानून के तहत गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला दिलाने की प्रक्रिया में बड़ी लापरवाही सामने आई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 33 जिलों में 6000 से ज्यादा बच्चों के दाखिले नहीं हो पाए हैं। समय सीमा खत्म होने के बाद भी सीटें खाली रह गईं, जिससे हजारों बच्चों का सपना टूट गया। इस मामले को लेकर अभिभावकों और शिक्षा विभाग के बीच विवाद की स्थिति बन गई है। शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत मिलने वाले इस मौके से वंचित रह गए बच्चों के भविष्य को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।

6000 से ज्यादा बच्चों का दाखिला अधूरा

रिपोर्ट के अनुसार, RTE के तहत निजी स्कूलों में गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए सीटें निर्धारित की गई थीं। लेकिन प्रक्रिया में देरी और तकनीकी समस्याओं के कारण 6000 से ज्यादा सीटें खाली रह गईं।

इन सीटों पर दाखिले नहीं हो पाने के प्रमुख कारण:

  • दस्तावेज सत्यापन में देरी
  • पोर्टल संबंधी तकनीकी समस्याएं
  • स्कूलों की लापरवाही
  • समय पर जानकारी का अभाव

इन कारणों से हजारों बच्चे दाखिले से वंचित रह गए।

33 जिलों में सामने आई समस्या

बताया जा रहा है कि राज्य के 33 जिलों में यह समस्या सामने आई है। कई जिलों में बड़ी संख्या में सीटें खाली रह गईं।

कुछ जिलों में स्थिति और गंभीर बताई जा रही है, जहां:

  • कई स्कूलों में सीटें खाली
  • दस्तावेज जांच लंबित
  • अभिभावकों को जानकारी नहीं

इससे स्पष्ट है कि प्रक्रिया को सही तरीके से लागू नहीं किया गया।

अभिभावकों में नाराजगी

इस मामले को लेकर अभिभावकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। कई अभिभावकों का कहना है कि उन्होंने समय पर आवेदन किया था, लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

अभिभावकों की शिकायतें:

  • पोर्टल बार-बार बंद
  • दस्तावेज अपलोड में समस्या
  • स्कूलों से सहयोग नहीं

अभिभावकों ने प्रशासन से दोबारा मौका देने की मांग की है।

शिक्षा विभाग ने मांगी रिपोर्ट

मामले को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग ने सभी जिलों से रिपोर्ट मांगी है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जल्द से जल्द स्थिति स्पष्ट करें।

शिक्षा विभाग की कार्रवाई:

  • जिलों से डेटा मांगा गया
  • जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान
  • नई प्रक्रिया पर विचार

विभाग का कहना है कि बच्चों के हित में उचित निर्णय लिया जाएगा।

निजी स्कूलों की भूमिका पर सवाल

इस पूरे मामले में निजी स्कूलों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कई स्कूलों ने समय पर सीटों की जानकारी नहीं दी।

संभावित समस्याएं:

  • सीटों की गलत जानकारी
  • दस्तावेज सत्यापन में देरी
  • अभिभावकों को सूचना नहीं

इससे दाखिला प्रक्रिया प्रभावित हुई।

RTE के तहत मिलती है मुफ्त शिक्षा

RTE योजना के तहत निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जाती है।

इस योजना के फायदे:

  • निजी स्कूल में पढ़ाई का मौका
  • बेहतर शिक्षा
  • बच्चों का भविष्य सुरक्षित

लेकिन इस बार प्रक्रिया में लापरवाही से कई बच्चे इस सुविधा से वंचित रह गए।

दोबारा मौका देने की मांग

अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने सरकार से दोबारा मौका देने की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चों का भविष्य दांव पर है।

मांगें:

  • दोबारा आवेदन प्रक्रिया
  • अतिरिक्त समय
  • दस्तावेज सत्यापन में राहत

यदि ऐसा किया जाता है तो हजारों बच्चों को राहत मिल सकती है।

भविष्य में सुधार की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की समस्याओं से बचने के लिए प्रक्रिया में सुधार जरूरी है।

संभावित सुधार:

  • बेहतर पोर्टल व्यवस्था
  • समय पर सूचना
  • निगरानी व्यवस्था

इससे भविष्य में ऐसी स्थिति से बचा जा सकता है।

निष्कर्ष

RTE दाखिला प्रक्रिया में हुई लापरवाही ने 6000 से ज्यादा बच्चों का सपना तोड़ दिया है। 33 जिलों में सीटें खाली रहना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। अब अभिभावकों को उम्मीद है कि सरकार इस मामले में हस्तक्षेप कर बच्चों को राहत देगी। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो हजारों बच्चों का भविष्य प्रभावित हो सकता है।

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Simran

Simran is a passionate journalist who reports on politics, public policy, and social issues. Her work focuses on delivering reliable news, in-depth insights, and timely updates to readers.

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