अक्षय कुमार और निर्देशक प्रियदर्शन की जोड़ी से दर्शकों को हमेशा बड़ी उम्मीदें रहती हैं, खासकर जब बात हॉरर-कॉमेडी की हो। लेकिन नई फिल्म ‘भूत बंगला’ इन उम्मीदों पर खरी उतरती नजर नहीं आती। ‘भूल भुलैया’ जैसी सफलता के बाद दर्शकों को एक बार फिर वैसी ही एंटरटेनमेंट की उम्मीद थी, लेकिन फिल्म कहानी, डर और कॉमेडी—तीनों मोर्चों पर कमजोर साबित होती है।
कहानी में नजर आया अधूरापन
फिल्म की कहानी एक पुराने हवेलीनुमा बंगले के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां कुछ रहस्यमयी घटनाएं होती हैं। हालांकि शुरुआत दिलचस्प लगती है, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, वह कमजोर और बिखरी हुई नजर आती है। पटकथा में कसावट की कमी साफ दिखाई देती है, जिससे दर्शकों का जुड़ाव कम हो जाता है।
डर और कॉमेडी दोनों में कमी
हॉरर-कॉमेडी फिल्म होने के बावजूद ‘भूत बंगला’ न तो पूरी तरह डराने में सफल होती है और न ही हंसाने में। कुछ सीन जरूर प्रभाव डालते हैं, लेकिन कुल मिलाकर फिल्म में वह संतुलन नहीं बन पाता, जो इस जॉनर की फिल्मों के लिए जरूरी होता है। दर्शकों को कई जगह निराशा हाथ लगती है।
अक्षय कुमार का प्रदर्शन
अक्षय कुमार ने अपने किरदार को निभाने की कोशिश जरूर की है, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट के कारण उनका प्रदर्शन भी पूरी तरह उभर नहीं पाता। बाकी कलाकारों का अभिनय भी औसत ही नजर आता है, जिससे फिल्म का प्रभाव और कम हो जाता है।
म्यूजिक और तकनीकी पक्ष कमजोर
फिल्म का म्यूजिक भी खास प्रभाव नहीं छोड़ पाता। गाने यादगार नहीं बन पाते और बैकग्राउंड स्कोर भी कई जगह कमजोर लगता है। तकनीकी रूप से फिल्म ठीक-ठाक है, लेकिन इसमें कोई खास नई बात देखने को नहीं मिलती।
उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी फिल्म
कुल मिलाकर ‘भूत बंगला’ एक ऐसी फिल्म साबित होती है, जो बड़ी उम्मीदों के साथ आती है लेकिन दर्शकों को निराश कर देती है। ‘भूल भुलैया’ जैसी फिल्म के बाद दर्शकों को जिस स्तर की हॉरर-कॉमेडी की उम्मीद थी, वह यहां पूरी होती नजर नहीं आती।