नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति लाइनों में से एक — स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज — एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है। हालिया घटनाओं के बाद ईरान द्वारा इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर कड़ी पाबंदियों की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में हलचल पैदा कर दी है। भारत के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील है, क्योंकि उसके कच्चे तेल आयात का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर आता है। ऐसे में नई दिल्ली ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कई बैकअप विकल्प सक्रिय कर दिए हैं।
क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है। फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ने वाला यह संकरा जलमार्ग वैश्विक तेल व्यापार की जीवनरेखा है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
भारत के लिए इसका महत्व और भी ज्यादा है। अनुमान है कि भारत के कुल कच्चे तेल आयात का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से आता है, इसलिए यहां किसी भी प्रकार की रुकावट का सीधा असर देश की ऊर्जा सुरक्षा और ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है।
ईरान की चेतावनी और बढ़ती समुद्री असुरक्षा
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच क्षेत्र में जहाजों पर हमलों और सुरक्षा चेतावनियों की घटनाएं बढ़ी हैं। रिपोर्टों के मुताबिक कई तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों पर हमले हुए, जिससे समुद्री यातायात में भारी गिरावट आई है।
इसी पृष्ठभूमि में ईरान द्वारा हॉर्मुज मार्ग से कुछ तेल टैंकरों की आवाजाही रोकने की खबरों ने वैश्विक बाजार को चिंतित कर दिया है। भारत के कई जहाज भी इस क्षेत्र में मौजूद हैं और उनकी सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है।
भारत की पहली रणनीति: कूटनीतिक बातचीत
इस संकट से निपटने के लिए भारत ने सबसे पहले कूटनीतिक चैनलों को सक्रिय किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय लगातार ईरान से बातचीत कर रहा है ताकि भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके।
हाल के दिनों में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच हुई बातचीत के बाद कुछ जहाजों को गुजरने की अनुमति मिलने की खबर भी सामने आई है, जिससे स्थिति में आंशिक राहत मिली है।
दूसरा विकल्प: नौसेना सुरक्षा और समुद्री निगरानी
अगर स्थिति और बिगड़ती है तो भारत अपने व्यापारिक जहाजों को नौसैनिक सुरक्षा देने पर भी विचार कर रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक भारतीय नौसेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद जहाजों की निगरानी बढ़ा दी गई है।
इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय जहाज और नाविक किसी भी संभावित हमले या समुद्री जोखिम से सुरक्षित रहें।
तीसरी रणनीति: तेल आयात के वैकल्पिक स्रोत
भारत ने तेल आपूर्ति के लिए वैकल्पिक स्रोतों पर भी तेजी से काम शुरू कर दिया है। सरकार ने तेल कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि वे अधिक देशों से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाएं।
रिपोर्टों के मुताबिक भारत अब 40 से अधिक देशों से तेल आयात करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, ताकि किसी एक समुद्री मार्ग या क्षेत्र पर निर्भरता कम हो सके।
इस रणनीति में रूस, अमेरिका, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों से आयात बढ़ाना शामिल है।
रणनीतिक तेल भंडार से मिलेगी राहत
ऊर्जा संकट से निपटने के लिए भारत के पास रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार भी मौजूद है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश के पास लगभग आठ सप्ताह तक चलने वाला तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का संयुक्त स्टॉक मौजूद है।
यह भंडार आपातकालीन स्थिति में देश की ऊर्जा जरूरतों को कुछ समय तक पूरा करने में मदद कर सकता है, जिससे तत्काल संकट की संभावना कम हो जाती है।
वैश्विक बाजार पर संभावित असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। इससे पेट्रोल-डीजल महंगे होने के साथ-साथ महंगाई और वैश्विक व्यापार पर भी असर पड़ सकता है।
भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों के लिए यह स्थिति आर्थिक और रणनीतिक दोनों दृष्टि से चुनौतीपूर्ण हो सकती है।