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महाराष्ट्र में भारी बारिश का कहर: झरने में फंसे 100 पर्यटक बचाए गए, वसई में जलमग्न हुईं 20 कारें

महाराष्ट्र में मानसून अपने पूरे शबाब पर है, और इसके साथ ही कई इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में भारी ...

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Author: Jagraj Published: 5 Jul 2026, 8:50 PM Updated: 11 Jul 2026, 7:01 PM Views: 49
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महाराष्ट्र में मानसून अपने पूरे शबाब पर है, और इसके साथ ही कई इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं, झरने खतरनाक रूप से बह रहे हैं और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति गंभीर हो गई है। इसी कड़ी में एक बड़ी घटना सामने आई जहां एक लोकप्रिय झरने में अचानक पानी का स्तर बढ़ने से लगभग 100 पर्यटक फंस गए।

Photo: Sayan Samanta / Pexels

यह घटना राज्य के एक प्रमुख पर्यटन स्थल पर हुई, जहां सप्ताहांत का आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। अचानक हुई मूसलाधार बारिश और ऊपर से आए पानी के कारण झरने का प्रवाह इतना तेज हो गया कि वहां मौजूद पर्यटक सुरक्षित स्थानों पर नहीं पहुंच पाए। वे एक चट्टानी इलाके में फंस गए और चारों ओर से पानी से घिर गए।

स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों को तुरंत इसकी सूचना दी गई। बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण था क्योंकि पानी का बहाव बहुत तेज था और फिसलन भरी चट्टानें बचाव कार्य में बाधा डाल रही थीं। हालांकि, बचाव दल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रस्सी के सहारे पर्यटकों तक पहुंचने का प्रयास किया।

Photo: Shekhar Bhat / Pexels

कई घंटों तक चले इस जटिल अभियान में, बचाव दल ने एक-एक करके फंसे हुए पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाला। रस्सी और अन्य विशेष उपकरणों का उपयोग करके, सभी 100 पर्यटकों को सफलतापूर्वक बचा लिया गया। इस दौरान कुछ पर्यटकों को हल्की चोटें आईं, लेकिन कोई गंभीर हताहत नहीं हुआ, जो एक बड़ी राहत की बात है।

इसी बीच, राज्य के पालघर जिले के वसई इलाके से भी चिंताजनक खबरें सामने आई हैं। भारी बारिश के कारण वसई के कई निचले इलाकों में पानी भर गया है, जिससे सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सड़कों पर पानी भरने से यातायात बाधित हुआ और कई वाहन पानी में डूब गए।

Photo: Darshan Karki / Pexels

स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, वसई में कम से कम 20 कारें पूरी तरह से पानी में डूब गईं। इन कारों के मालिक सुबह जब अपने वाहनों के पास पहुंचे तो उन्हें पानी में डूबा हुआ पाया। यह घटना बारिश की तीव्रता और जल निकासी व्यवस्था पर भारी दबाव को दर्शाती है।

जलभराव के कारण वसई में कई घरों और दुकानों में भी पानी घुस गया है, जिससे लोगों को भारी नुकसान हुआ है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से घरों में रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है। आपदा प्रबंधन टीमें लगातार स्थिति पर नजर रख रही हैं और प्रभावित इलाकों में सहायता पहुंचा रही हैं।

महाराष्ट्र में मानसून की शुरुआत से ही इस तरह की घटनाएं देखी जा रही हैं। राज्य के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से लगातार भारी बारिश हो रही है, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक और अधिक बारिश की चेतावनी जारी की है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी नियोजन और जल निकासी प्रणालियों को मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। जलवायु परिवर्तन के कारण चरम मौसमी घटनाओं की आवृत्ति बढ़ रही है, और इसके लिए शहरों को अधिक लचीला बनाने की आवश्यकता है।

राज्य सरकार ने प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्यों को तेज करने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा है। लोगों से भी अपील की गई है कि वे नदियों और झरनों के पास न जाएं और प्रशासन द्वारा जारी की गई चेतावनियों का पालन करें।

यह घटना एक बार फिर प्रकृति की शक्ति और मानसून के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के महत्व को रेखांकित करती है। पर्यटकों और स्थानीय निवासियों दोनों को मौसम की स्थिति के प्रति अत्यधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है ताकि ऐसी अप्रिय घटनाओं से बचा जा सके।

बिहार की कोसी नदी का उल्लेख हालांकि महाराष्ट्र की घटनाओं से सीधे तौर पर जुड़ा नहीं है, लेकिन यह भारत के अन्य हिस्सों में भी मानसून के प्रभाव को दर्शाता है। कोसी, जिसे 'बिहार का शोक' भी कहा जाता है, मानसून के दौरान अक्सर उफान पर रहती है और अपने मार्ग बदलने के लिए कुख्यात है, जिससे बड़े पैमाने पर बाढ़ और विस्थापन होता है। यह पूरे देश में मानसून के व्यापक प्रभाव की याद दिलाता है।

मानसून की चुनौतियां और शहरी लचीलापन

महाराष्ट्र में हुई ये घटनाएं मानसून के दौरान शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाली चुनौतियों का स्पष्ट उदाहरण हैं। पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा उपायों को मजबूत करना और शहरी क्षेत्रों में बेहतर जल निकासी प्रणालियों का विकास करना समय की मांग है। जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के साथ, सरकारों और समुदायों को मिलकर काम करना होगा ताकि ऐसी आपदाओं के प्रभाव को कम किया जा सके और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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Jagraj

Staff Reporter at VG Khabar.

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