बेंगलुरु, 22 मई 2026: कर्नाटक के कई ज़िलों में अगले कुछ दिनों में भारी बारिश की प्रबल संभावना है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने राज्य के लिए चेतावनी जारी की है। राज्य के तटीय और दक्षिणी हिस्सों में मानसून-पूर्व बौछारें पहले से ही सक्रिय हैं। यह दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन का स्पष्ट संकेत है, जो 26 मई के आसपास केरल में दस्तक देगा और कुछ दिनों बाद कर्नाटक भी पहुँचेगा।
IMD की चेतावनी — मुख्य बातें
- अगले 3-4 दिन: भारी बारिश की चेतावनी कर्नाटक और तमिलनाडु दोनों के लिए
- तेज़ बारिश के साथ बिजली कड़कने और तेज़ हवाओं की संभावना
- तटीय क्षेत्रों में बारिश की तीव्रता और अधिक हो सकती है
- मलनाड और पश्चिमी घाट के इलाक़ों में भूस्खलन का जोखिम

संभावित प्रभावित ज़िले
तटीय कर्नाटक
- दक्षिण कन्नड़ (मंगलूरु) — भारी बारिश की प्रबल संभावना
- उडुपी — मूसलाधार बारिश के आसार
- उत्तर कन्नड़ (कारवार) — सामान्य से अधिक वर्षा
मलनाड क्षेत्र
- शिवमोग्गा, चिक्कमगलूर — भारी बारिश की संभावना
- कोडगु (कुर्ग) — हिल स्टेशन क्षेत्र, भूस्खलन सावधानी
- हसन, मांड्या — सामान्य से अधिक बारिश
दक्षिणी कर्नाटक
- बेंगलुरु शहर/ग्रामीण — गरज के साथ बौछारों की संभावना
- मैसूर, चामराजनगर — बादल छाए रहने के आसार
- तुमकूर, रामनगर — हल्की से मध्यम बारिश
बेंगलुरु — आईटी राजधानी पर असर
देश की आईटी राजधानी बेंगलुरु में बारिश के दौरान कुछ इलाक़ों में जलभराव की समस्या आम है। हाल के वर्षों में शहर ने तेज़ बारिश के कारण कई बार बाधाओं का सामना किया है। बेंगलुरु निगम (BBMP) ने नालियों की सफ़ाई और जल निकासी व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है।
राज्य आपदा प्रबंधन की तैयारियाँ
- तटीय और मलनाड ज़िलों में NDRF और SDRF की टीमें सतर्क
- मछुआरों के लिए समुद्र में जाने को लेकर परामर्श जारी
- पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन-संवेदनशील ज़ोन की निगरानी
- स्थानीय प्रशासन को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश

लोगों के लिए सुझाव
- घर से निकलने से पहले स्थानीय मौसम की जानकारी ज़रूर लें
- बेंगलुरु के निचले इलाक़ों में रहने वाले लोग सावधान रहें
- बिजली कड़कते समय खुले मैदान, पेड़ों या धातु संरचनाओं के पास न खड़े हों
- पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोग भूस्खलन की संभावना पर नज़र रखें
- आपदा प्रबंधन हेल्पलाइन नंबर हाथ में रखें
कृषि पर सकारात्मक असर
कर्नाटक में कॉफ़ी, चाय, इलायची, काली मिर्च जैसी फ़सलें होती हैं जिनके लिए समय पर अच्छी बारिश बहुत महत्वपूर्ण है। मानसून का जल्दी आना राज्य के किसानों के लिए सकारात्मक संकेत है। साथ ही ख़रीफ़ की बुवाई समय पर शुरू हो सकेगी।
(समाचार स्रोत: IMD, india.com, sundayguardianlive.com, news24online.com)