Income Tax Department News: केंद्र सरकार के खजाने में प्रत्यक्ष कर विभाग साल में 23 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का वसूली करता है। लेकिन इसके 97 फीसदी कर्मचारी और अधिकारी परेशान हैं। उनका कहना है कि सरकार कर्मचारियों की लंबित मांगों पर कोई ध्यान नहीं दे रही है। इस वजह से वे आंदोलन को मजबूर हैं।
नई दिल्ली: सरकारी खजाने के लिए साल में 23 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा की वसूली करने वाले आयकर विभाग (Income Tax Department) के कर्मचारी परेशान हैं। उन्होंने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर प्रोमोशन और काम के दबाव समेत 10 लंबित मुद्दों का जिक्र किया है। इन कर्मचारियों ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) के तहत काम करने वाले सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) पर इन्हें हल करने में लगातार उदासीनता बरतने का आरोप लगाया है।
आंदोलन करेंगे कर्मचारी
आयकर विभाग में काम करने वाले कर्मचारियों के संगठन इनकम टैक्स इम्पलायीज फेडरेशन (ITEF) और इनकम टैक्स विभाग में प्रोमोटी अधिकारियों के संगठन इनकम टैक्स गजेटेड ऑफिसर्स एसोसिएशन (ITGOA) ने मिल कर ज्वॉइंट कांउसिल ऑफ एक्शन बनाया है। इसके ज्वॉइंट कन्वेनर रुपक सरकार ने बताया कि यदि सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती है तो वे सात चरणों का आंदोलन करेंगे। आंदोलन की शुरुआत कल यानी गुरुवार, 16 अप्रैल 2026 से होगी। उस दिन आयकर विभाग के सभी कार्यालयों में लंच के समय प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद चरणबद्ध विरोध प्रदर्शन शुरू होगा।
आयकर विभाग के 97% कार्मिकों का प्रतिनिधित्व!
रुपक सरकार का कहना है कि आईटीईएफ और आईटीजीओए मिलकर आयकर विभाग के लगभग 97 फीसदी कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ये कर्मचारी और अधिकारी प्रत्यक्ष कर श्रेणी के तहत सरकार के लिए रेवेन्यू कलेक्शन का काम करते हैं। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार साल 2025-26 के दौरान 17 मार्च 2026 तक प्रत्यक्ष कर के मद में 22.80 लाख करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी थी। इसमें अभी और राशि जुड़ेगी क्योंकि वित्त वर्ष की समाप्ति के समय ज्यादा राशि जमा की जाती है।क्या है मांग
इसी महीने 6 अप्रैल को इन्होंने
वित्त मंत्रालय के रेवेन्यू सेक्रेटरी को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में जेसीए ने 10 लंबित मुद्दों का जिक्र किया है। इनका कहना है कि सीबीडीटी इन मसलों को हल करने में लगातार उदासीनता बरत रहा है। रुपक सरकार का कहना है ‘करिअर उन्नति में रुकावटें और प्रमोशन की कम संभावनाएं, अव्यवहारिक वार्षिक सामान्य तबादले, अस्थिर सेवा शर्तें, काम का बेवजह दबाव, अवास्तविक लक्ष्य और कर्मचारियों तथा जरूरी बुनियादी ढांचे की भारी कमी ने हमारे सदस्यों को बिल्कुल हाशिये पर धकेल दिया है।’ जेसीए ने दावा किया कि दोनों संगठनों के सदस्यों को बेवजह परेशान किया जा रहा है। जिससे उनका मनोबल बिल्कुल निचले स्तर पर पहुंच गया है।
आंदोलन के 7 चरण में क्या
जेसीए के मुताबकि वे सात चरणों वाले आंदोलन का सहारा लेंगे। इसकी शुरुआत 16 अप्रैल को विभाग के सभी कार्यालयों में लंच के समय प्रदर्शन से होगी। इसके बाद आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसमें ‘काली पट्टी’ लगाना और सांख्यिकीय रिपोर्ट जमा न करना शामिल होगा। इसके बाद धीरे-धीरे आंदोलन आगामी 13 मई को पूर्ण-दिवसीय हड़ताल तक पहुंचेगा। जेसीए ने यह भी कहा है कि उनके कैडर की समीक्षा और पुनर्गठन का काम 13 साल पहले हुआ था और यह बहुत लंबे समय से लंबित है।