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बस्तर में 108 माओवादियों का आत्मसमर्पण

बस्तर में 108 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण, 3.95 करोड़ के इनामी नक्सलियों ने छोड़े हथियार, सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली।

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Author: Simran Published: 11 Mar 2026, 5:42 PM Updated: 5 Jul 2026, 10:57 PM Views: 109
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बस्तर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। राज्य में लंबे समय से सक्रिय 108 माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। इन सभी नक्सलियों पर कुल मिलाकर 3 करोड़ 95 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इस आत्मसमर्पण को छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री भी सुरक्षा बलों के हवाले की। अधिकारियों के अनुसार यह अब तक की सबसे बड़ी हथियार बरामदगी में से एक है, जिससे नक्सल नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।

कई जिलों के माओवादी शामिल

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली बस्तर संभाग के अलग-अलग जिलों से जुड़े हुए थे। अधिकारियों के अनुसार इनमें सबसे अधिक माओवादी बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बस्तर, नारायणपुर और कांकेर जिलों से संबंधित हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक

  • 37 नक्सली बीजापुर से

  • 30 दंतेवाड़ा से

  • 18 सुकमा से

  • 16 बस्तर से

  • 4 नारायणपुर से

  • 3 कांकेर से

ये सभी नक्सली संगठन की दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) से जुड़े हुए थे, जो दक्षिण बस्तर में कई हिंसक घटनाओं के लिए जिम्मेदार रही है।

सुरक्षा बलों को मिली बड़ी सफलता

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार आत्मसमर्पण के साथ ही नक्सलियों के ठिकानों से हथियारों का बड़ा जखीरा भी बरामद किया गया है।

जांच में सामने आया कि नक्सलियों के ठिकानों से

  • बड़ी मात्रा में आधुनिक हथियार

  • विस्फोटक सामग्री

  • करीब 3.61 करोड़ रुपये नकद

  • लगभग 1 किलो सोना

बरामद किया गया है। यह अब तक नक्सल विरोधी अभियान में एक ही स्थान से मिली सबसे बड़ी बरामदगी मानी जा रही है।

‘पूना मारगेम’ पहल का असर

अधिकारियों का कहना है कि यह आत्मसमर्पण राज्य सरकार और सुरक्षा बलों की “पूना मारगेम” पहल का परिणाम है। इस पहल का उद्देश्य नक्सलियों को हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित करना है।

इस योजना के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को पुनर्वास, रोजगार, प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता दी जाती है। इससे कई माओवादी अब हथियार छोड़कर सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं।

सरकार की रणनीति से कम हो रहा नक्सल प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा बलों की सक्रियता और विकास कार्यों के कारण नक्सल प्रभाव धीरे-धीरे कम हो रहा है।

राज्य सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े कई विकास कार्यक्रम शुरू किए हैं। इसके अलावा गांव-गांव तक प्रशासन की पहुंच बढ़ाने के लिए नए सुरक्षा कैंप भी स्थापित किए गए हैं।

सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त किया जाए।

आत्मसमर्पित नक्सलियों का होगा पुनर्वास

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सहायता दी जाएगी।

इस नीति के तहत उन्हें

  • आर्थिक सहायता

  • कौशल प्रशिक्षण

  • रोजगार के अवसर

  • आवास और अन्य सुविधाएं

प्रदान की जाती हैं ताकि वे सामान्य जीवन जी सकें और समाज में सम्मानजनक तरीके से रह सकें।

सरकार का मानना है कि यदि नक्सल प्रभावित युवाओं को शिक्षा, रोजगार और बेहतर जीवन के अवसर मिलते हैं तो वे हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकते हैं।

बस्तर में शांति की ओर बड़ा कदम

108 माओवादियों का एक साथ आत्मसमर्पण बस्तर क्षेत्र में शांति और स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इससे नक्सली संगठन की ताकत कमजोर होगी और स्थानीय लोगों में भी विश्वास बढ़ेगा। साथ ही विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

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Simran

Simran is a passionate journalist who reports on politics, public policy, and social issues. Her work focuses on delivering reliable news, in-depth insights, and timely updates to readers.

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