बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सिंधी समाज द्वारा चेट्रीचंड्र (चेटीचंड) पर्व के अवसर पर भव्य आयोजन किया गया। इस मौके पर भगवान झूलेलाल के जन्मोत्सव को उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाते हुए महिलाओं ने स्कूटी रैली निकालकर समाज में एकजुटता और सांस्कृतिक पहचान का संदेश दिया। शहर की सड़कों पर पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं की यह रैली आकर्षण का केंद्र रही।
धार्मिक आस्था और उत्साह का अनोखा संगम
चेट्रीचंड्र, जिसे सिंधी नववर्ष के रूप में मनाया जाता है, सिंधी समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन भगवान झूलेलाल की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। बिलासपुर में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं, युवतियां और समाज के अन्य सदस्य शामिल हुए।
रैली की शुरुआत शहर के प्रमुख मंदिर परिसर से हुई, जहां भगवान झूलेलाल की आरती के बाद श्रद्धालुओं ने रैली का शुभारंभ किया। इसके बाद स्कूटी पर सवार महिलाएं शहर के विभिन्न मार्गों से होकर गुजरीं।
स्कूटी रैली बनी आकर्षण का केंद्र
स्कूटी रैली में शामिल महिलाओं ने पारंपरिक सिंधी परिधान पहन रखे थे और हाथों में धार्मिक ध्वज व संदेश लिखी तख्तियां थीं। रैली के दौरान “झूलेलाल बेरा ही पार” जैसे जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
यह रैली न केवल धार्मिक आयोजन थी, बल्कि समाज में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और सशक्तिकरण का प्रतीक भी बनी। आयोजनकर्ताओं ने बताया कि इस तरह के कार्यक्रमों से युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने में मदद मिलती है।
सामाजिक एकजुटता का दिया संदेश
रैली के माध्यम से सिंधी समाज की महिलाओं ने एकता, भाईचारे और सामाजिक समरसता का संदेश दिया। कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने कहा कि इस तरह के आयोजन समाज को जोड़ने का काम करते हैं और पारंपरिक मूल्यों को आगे बढ़ाते हैं।
साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि समाज में महिलाओं की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है और वे हर क्षेत्र में अपनी भागीदारी निभा रही हैं।
सुरक्षा और व्यवस्था के रहे पुख्ता इंतजाम
रैली के दौरान प्रशासन और पुलिस द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहा और रैली के मार्ग पर विशेष निगरानी रखी गई।
किसी भी तरह की असुविधा से बचने के लिए आयोजकों ने भी पूरी तैयारी की थी, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हुआ।
संस्कृति को सहेजने की पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन समाज की पहचान को मजबूत करते हैं। चेट्रीचंड्र जैसे पर्व न केवल धार्मिक आस्था से जुड़े हैं, बल्कि यह समाज की सांस्कृतिक विरासत को भी जीवित रखते हैं।
बिलासपुर में आयोजित यह स्कूटी रैली इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है।
युवा पीढ़ी में बढ़ रही भागीदारी
इस आयोजन में युवतियों और छात्राओं की बड़ी संख्या में भागीदारी देखने को मिली। इससे यह साफ है कि नई पीढ़ी भी अपनी परंपराओं को लेकर जागरूक हो रही है।
आयोजकों का कहना है कि आने वाले वर्षों में इस आयोजन को और भव्य बनाने की योजना है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसमें शामिल हो सकें।
समापन पर हुआ भव्य आयोजन
रैली के समापन के बाद सामूहिक पूजा, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया। पूरे कार्यक्रम में उत्साह और श्रद्धा का माहौल बना रहा।