रायपुर। छत्तीसगढ़ में ऑटोमोबाइल सेक्टर ने इस वर्ष उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले ही राज्य में वाहन बिक्री ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। दोपहिया, कार, ट्रैक्टर और वाणिज्यिक वाहनों की खरीद में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार किसानों की बढ़ी आय, सरकारी योजनाओं और आर्थिक गतिविधियों में तेजी के कारण वाहन खरीद में उछाल आया है। इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सकारात्मक संकेत भी मिल रहे हैं।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची वाहन बिक्री
छत्तीसगढ़ में इस वित्तीय वर्ष में पहली बार मार्च से पहले ही करीब 2500 करोड़ रुपये के 71,714 वाहनों की बिक्री दर्ज की गई है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक है। फरवरी 2025 की इसी अवधि में करीब 57,224 वाहन बिके थे, जबकि इस साल यह संख्या काफी बढ़कर 71 हजार से अधिक पहुंच गई। इससे साफ है कि राज्य में ऑटोमोबाइल सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है और बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह वृद्धि केवल शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी वाहन खरीद का रुझान तेजी से बढ़ा है। किसान, छोटे व्यवसायी और मध्यम वर्ग के लोग बड़ी संख्या में वाहन खरीद रहे हैं।
दोपहिया और कार की बिक्री सबसे ज्यादा
वाहनों की बिक्री के आंकड़ों पर नजर डालें तो दोपहिया वाहनों की मांग सबसे अधिक रही है। इस अवधि में करीब 44,850 दोपहिया वाहन खरीदे गए। इसके अलावा 9,712 कारों की बिक्री भी दर्ज की गई है।
दोपहिया वाहन ग्रामीण और छोटे शहरों में आवागमन का सबसे लोकप्रिय साधन बने हुए हैं। वहीं शहरी क्षेत्रों में कारों की मांग में भी तेजी आई है। ऑटोमोबाइल डीलरों का कहना है कि आसान फाइनेंस विकल्प और आकर्षक ऑफर्स के कारण लोग वाहन खरीदने के लिए अधिक उत्साहित हैं।
कृषि और व्यापारिक गतिविधियों से बढ़ी मांग
राज्य में ट्रैक्टर और मालवाहक वाहनों की बिक्री भी अच्छी रही है। ग्रीष्मकालीन फसल और कृषि गतिविधियों को देखते हुए किसानों ने बड़ी संख्या में करीब 3,808 ट्रैक्टर खरीदे हैं। वहीं व्यापारिक गतिविधियों में बढ़ोतरी के कारण 3,014 मालवाहक वाहन भी खरीदे गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि उत्पादन में वृद्धि और ग्रामीण आय में सुधार से वाहन बाजार को बड़ा सहारा मिला है। किसान अब आधुनिक उपकरणों और वाहनों में निवेश करने के लिए तैयार हैं।
सरकारी नीतियों का भी पड़ा असर
वाहन बिक्री में वृद्धि के पीछे सरकारी नीतियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका बताई जा रही है। राज्य सरकार द्वारा किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल धान खरीदने और बोनस राशि के भुगतान से ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी का प्रवाह बढ़ा है।
इसका सीधा असर बाजार पर पड़ा और लोगों ने दोपहिया से लेकर कार और अन्य वाहनों की खरीदारी की। इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकार के बजट प्रावधानों और टैक्स छूट से भी ऑटोमोबाइल सेक्टर को बढ़ावा मिला है।
ऑटो एक्सपो से भी मिला बड़ा बूस्ट
रायपुर में आयोजित ऑटो एक्सपो ने भी वाहन बिक्री को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 20 जनवरी से 5 फरवरी के बीच आयोजित इस एक्सपो के दौरान 3299 करोड़ रुपये से अधिक के 61,074 वाहनों की बिक्री दर्ज की गई।
डीलरों के अनुसार एक्सपो के अंतिम दिनों में सबसे ज्यादा खरीदारी हुई और कुल कारोबार का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा 1 से 5 फरवरी के बीच हुआ।
इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में तेजी
छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। सरकार द्वारा ईवी खरीद पर न्यूनतम 10 प्रतिशत और अधिकतम 1 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है।
इसके चलते फरवरी में 15 हजार से अधिक इलेक्ट्रिक दोपहिया, ऑटो और मालवाहक वाहन खरीदे गए। इससे साफ है कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता और सरकारी प्रोत्साहन के कारण ईवी बाजार भी तेजी से बढ़ रहा है।
आर्थिक विकास का सकारात्मक संकेत
ऑटोमोबाइल सेक्टर के विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य की अर्थव्यवस्था में तेजी के कारण वाहन बाजार में भी उछाल आया है। खनिज, उद्योग, कृषि और निर्माण कार्यों में बढ़ोतरी से लोगों की आय बढ़ी है।
इसी कारण वाहन खरीद की क्षमता बढ़ी है और बाजार में लगातार मांग बनी हुई है। उद्योग जगत का मानना है कि यदि यही रफ्तार बनी रही तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार बन सकता है।