फूड डिलीवरी, कैब और ऑनलाइन सेवाओं से जुड़े श्रमिकों को मिलेगा सामाजिक सुरक्षा का दायरा
छत्तीसगढ़ में गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म आधारित श्रमिकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। राज्य के करीब 2 लाख गिग वर्कर्स को अब ई‑श्रम पोर्टल पर पंजीयन का अधिकार दिया गया है। इस फैसले के बाद फूड डिलीवरी, कैब सेवा, ई-कॉमर्स डिलीवरी और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।
छत्तीसगढ़ में बढ़ते डिजिटल रोजगार के बीच यह निर्णय लाखों श्रमिकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों को पहचान और सुरक्षा दोनों मिलेंगी। 👨💼📱
कौन होते हैं गिग वर्कर्स?
गिग वर्कर्स वे श्रमिक होते हैं जो डिजिटल प्लेटफॉर्म या ऐप के माध्यम से काम करते हैं। इसमें शामिल हैं:
- फूड डिलीवरी एजेंट
- कैब ड्राइवर
- ई-कॉमर्स डिलीवरी बॉय
- फ्रीलांसर
- ऑनलाइन सेवा प्रदाता
ऐसे श्रमिक आमतौर पर स्थायी नौकरी में नहीं होते, इसलिए उन्हें सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं नहीं मिल पातीं।
अब ई-श्रम पोर्टल पर पंजीयन के बाद इन श्रमिकों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।
2 लाख श्रमिकों को मिलेगा फायदा
श्रम विभाग के अनुसार, राज्य में लगभग 2 लाख गिग वर्कर्स काम कर रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या युवाओं की है, जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से रोजगार कर रहे हैं।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा संचालित ई-श्रम पोर्टल पर पंजीयन से इन श्रमिकों का डेटा तैयार होगा, जिससे उन्हें योजनाओं से जोड़ा जा सकेगा।
पंजीयन के बाद क्या मिलेगा लाभ?
ई-श्रम पोर्टल पर पंजीयन करने वाले गिग वर्कर्स को कई लाभ मिल सकते हैं:
- दुर्घटना बीमा सुविधा
- सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ
- भविष्य की पेंशन योजनाएं
- स्वास्थ्य सुविधाएं
- सरकारी योजनाओं में प्राथमिकता
- रोजगार सहायता
सरकार का कहना है कि पंजीयन के बाद श्रमिकों को पहचान संख्या भी दी जाएगी, जिससे उन्हें योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा।
डिजिटल रोजगार में बढ़ोतरी 📊
पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित रोजगार तेजी से बढ़ा है।
ऑनलाइन डिलीवरी, कैब सेवा और फ्रीलांसिंग जैसे कार्यों में युवाओं की भागीदारी बढ़ी है।
इस बदलाव को देखते हुए सरकार ने गिग वर्कर्स को औपचारिक व्यवस्था में शामिल करने का निर्णय लिया है।
श्रमिकों की लंबे समय से थी मांग
गिग वर्कर्स लंबे समय से सामाजिक सुरक्षा की मांग कर रहे थे।
उनका कहना था कि अस्थायी काम होने के कारण उन्हें नौकरी सुरक्षा और बीमा सुविधा नहीं मिलती।
अब इस फैसले से उन्हें राहत मिलने की उम्मीद है।
कैसे होगा पंजीयन?
ई-श्रम पोर्टल पर पंजीयन प्रक्रिया सरल रखी गई है।
श्रमिक इन माध्यमों से पंजीयन कर सकते हैं:
- ऑनलाइन आवेदन
- कॉमन सर्विस सेंटर
- मोबाइल एप
- श्रम विभाग कार्यालय
पंजीयन के लिए आधार कार्ड और मोबाइल नंबर की आवश्यकता होगी।
राज्य सरकार की पहल
छत्तीसगढ़ श्रम विभाग ने जिला स्तर पर पंजीयन अभियान चलाने की तैयारी की है।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अधिक से अधिक गिग वर्कर्स को पंजीयन के लिए प्रेरित किया जाए।
इससे श्रमिकों को जल्द लाभ मिल सकेगा।
सामाजिक सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला गिग अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
इससे असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को पहचान और सुरक्षा मिलेगी।
यह कदम श्रमिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में मदद करेगा।
युवाओं के लिए राहत
गिग वर्कर्स में बड़ी संख्या युवाओं की है।
ई-श्रम पोर्टल पर पंजीयन से उन्हें भविष्य की सुरक्षा मिलेगी।
इससे रोजगार के नए अवसर भी बढ़ सकते हैं।
भविष्य की योजनाएं भी संभव
सरकार भविष्य में गिग वर्कर्स के लिए विशेष योजनाएं भी शुरू कर सकती है।
इनमें शामिल हो सकती हैं:
- बीमा योजना
- पेंशन योजना
- स्वास्थ्य योजना
- कौशल विकास कार्यक्रम
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ के करीब 2 लाख गिग वर्कर्स के लिए ई-श्रम पोर्टल पर पंजीयन का अधिकार बड़ी राहत लेकर आया है। इससे फूड डिलीवरी, कैब और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलेगा। यह फैसला असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को औपचारिक व्यवस्था में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आने वाले समय में इस पहल से श्रमिकों की आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी और डिजिटल रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।