रायपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) और बढ़ती गैस कीमतों के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ने की तैयारी कर ली है। राजधानी रायपुर में प्रस्तावित इस घेराव कार्यक्रम में करीब 30 हजार कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे राजनीतिक माहौल गरमाने के आसार हैं।
कांग्रेस का कहना है कि आम जनता से जुड़े इन मुद्दों पर सरकार लगातार अनदेखी कर रही है, जिसके खिलाफ अब सड़क पर उतरकर विरोध दर्ज कराया जाएगा।
मनरेगा भुगतान और काम को लेकर नाराजगी
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि राज्य में मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों को समय पर भुगतान नहीं मिल रहा है।
इसके अलावा कई जगहों पर काम की कमी और रोजगार के अवसर घटने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
पार्टी नेताओं का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा गरीबों के लिए जीवनरेखा है, लेकिन इसकी स्थिति लगातार बिगड़ रही है।
बढ़ती गैस कीमतों पर भी विरोध
रसोई गैस की कीमतों में लगातार वृद्धि भी इस आंदोलन का बड़ा मुद्दा है।
कांग्रेस का आरोप है कि महंगाई ने आम लोगों की कमर तोड़ दी है और सरकार इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है।
गृहिणियों और मध्यम वर्ग पर बढ़ते खर्च को लेकर भी पार्टी ने चिंता जताई है।
रायपुर में होगा बड़ा शक्ति प्रदर्शन
कांग्रेस द्वारा आयोजित इस घेराव कार्यक्रम को लेकर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।
राज्यभर से कार्यकर्ताओं को रायपुर बुलाया गया है, जिससे यह एक बड़ा राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन बन सकता है।
पार्टी का दावा है कि करीब 30 हजार कार्यकर्ता इस आंदोलन में हिस्सा लेंगे।
प्रशासन अलर्ट मोड पर
बड़े पैमाने पर होने वाले इस प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन भी सतर्क हो गया है।
रायपुर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की जा रही है और ट्रैफिक को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।
संभावित भीड़ को देखते हुए पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की जाएगी।
सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आंदोलन सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है।
कांग्रेस इन मुद्दों के जरिए जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है और सरकार की नीतियों को घेरना चाहती है।
जनता से जुड़े मुद्दों पर फोकस
मनरेगा और गैस कीमत जैसे मुद्दे सीधे तौर पर आम लोगों से जुड़े हैं।
ऐसे में यह आंदोलन राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे जनता के बीच संदेश जाएगा कि पार्टी उनकी समस्याओं को लेकर गंभीर है।