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कांग्रेस में मची कलह! राहुल गांधी के भारत लौटते ही होगी रार? अमित शाह से मिले सांसद रंधावा

कांग्रेस में नई दरार के संकेतभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर एक बार फिर अंदरूनी कलह के बादल मंडराते दिख रहे हैं।

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Author: Jagraj Published: 4 Jul 2026, 4:20 PM Updated: 5 Jul 2026, 2:52 PM Views: 10
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कांग्रेस में नई दरार के संकेत

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर एक बार फिर अंदरूनी कलह के बादल मंडराते दिख रहे हैं। ऐसी खबरें हैं कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच नए सिरे से मतभेद उभर रहे हैं, जिससे पार्टी की एकता और भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं। यह स्थिति ऐसे समय में उत्पन्न हुई है जब राहुल गांधी के विदेश से भारत लौटने की उम्मीद है, जिससे राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें तेज हो गई हैं कि उनकी वापसी के बाद पार्टी के भीतर की रार और बढ़ सकती है।

Photo: Ramaz Bluashvili / Pexels

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस सांसद रंधावा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात ने इन अटकलों को और हवा दे दी है। हालांकि इस मुलाकात का आधिकारिक एजेंडा स्पष्ट नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे कांग्रेस के भीतर बढ़ते असंतोष और संभावित दलबदल के संकेत के रूप में देख रहे हैं। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब कई राज्यों में आगामी चुनावों को देखते हुए कांग्रेस को एक मजबूत और एकजुट मोर्चे की आवश्यकता है।

पिछले कुछ वर्षों से कांग्रेस लगातार आंतरिक चुनौतियों का सामना कर रही है। नेतृत्व के मुद्दे, चुनावी हार और प्रमुख नेताओं के पार्टी छोड़ने से पार्टी की स्थिति कमजोर हुई है। राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर भी पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह सवाल उठते रहे हैं। उनकी विदेश यात्राएं और भारत से अनुपस्थिति अक्सर आलोचना का विषय रही है, जिससे यह धारणा बनी है कि वे पार्टी के मामलों में पूरी तरह से सक्रिय नहीं हैं।

Photo: raksasok heng / Pexels

रंधावा जैसे अनुभवी सांसद का सत्तारूढ़ दल के एक प्रमुख नेता से मिलना निश्चित रूप से कांग्रेस आलाकमान के लिए चिंता का विषय है। यह घटनाक्रम पार्टी के भीतर 'जी-23' जैसे असंतुष्ट समूहों के पुनरुत्थान की संभावना को भी दर्शाता है, जिन्होंने पहले भी नेतृत्व परिवर्तन और संगठनात्मक सुधारों की मांग की थी। यदि रंधावा की मुलाकात के पीछे कोई राजनीतिक मंशा है, तो यह कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।

आगामी दिनों में राहुल गांधी की वापसी से पार्टी में एक नई ऊर्जा आने की उम्मीद है, लेकिन साथ ही यह भी संभावना है कि उनकी वापसी के बाद आंतरिक मतभेद सतह पर आ सकते हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि राहुल गांधी इन चुनौतियों का सामना कैसे करते हैं और क्या वे पार्टी को एकजुट रखने में सफल होते हैं। कांग्रेस को एक मजबूत विपक्ष के रूप में अपनी भूमिका निभाने के लिए आंतरिक स्थिरता और स्पष्ट रणनीति की आवश्यकता है।

Photo: Ganesh Adyapady / Pexels

इस पूरे घटनाक्रम का असर न केवल कांग्रेस पर पड़ेगा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। यदि कांग्रेस अपनी आंतरिक कलह को नियंत्रित करने में विफल रहती है, तो यह अन्य विपक्षी दलों के लिए भी एक कमजोर संकेत होगा और भाजपा को और मजबूत होने का अवसर प्रदान करेगा। विपक्ष की एकता के लिए कांग्रेस का मजबूत और एकजुट होना अनिवार्य है।

पार्टी के भीतर के समीकरणों को समझना महत्वपूर्ण है। कई वरिष्ठ नेता अपनी भूमिका और पार्टी के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। युवा नेताओं और अनुभवी नेताओं के बीच समन्वय की कमी भी एक बड़ी चुनौती रही है। इन मुद्दों को संबोधित किए बिना, कांग्रेस के लिए अपनी खोई हुई जमीन वापस पाना मुश्किल होगा।

रंधावा की अमित शाह से मुलाकात के बाद, कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व को तुरंत इस स्थिति का संज्ञान लेना चाहिए। उन्हें रंधावा से संपर्क कर उनकी चिंताओं को समझना चाहिए और पार्टी के भीतर किसी भी संभावित दरार को रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए। इस तरह की मुलाकातें अक्सर बड़े राजनीतिक बदलावों का अग्रदूत होती हैं।

यह भी संभव है कि यह मुलाकात किसी व्यक्तिगत या गैर-राजनीतिक मुद्दे पर हुई हो, लेकिन वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए, इसे केवल एक सामान्य मुलाकात मानना मुश्किल है। राजनीतिक गलियारों में हर छोटी घटना को बड़े संदर्भ में देखा जाता है, खासकर जब प्रमुख राजनीतिक हस्तियां शामिल हों।

कांग्रेस के लिए यह एक महत्वपूर्ण मोड़ है। उन्हें न केवल अपने आंतरिक मुद्दों को सुलझाना होगा, बल्कि एक स्पष्ट और आकर्षक एजेंडा भी प्रस्तुत करना होगा जो मतदाताओं को आकर्षित कर सके। केवल तभी वे एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में उभर सकते हैं और देश की राजनीति में अपनी प्रासंगिकता बनाए रख सकते हैं।

राहुल गांधी की वापसी के बाद, पार्टी में एक बार फिर से संगठनात्मक बदलावों और रणनीतिक पुनर्मूल्यांकन की उम्मीद की जा सकती है। यह देखना होगा कि क्या वे पार्टी को एक नई दिशा देने में सक्षम होंगे और क्या वे सभी गुटों को एक साथ लाने में सफल होंगे। चुनौती बड़ी है, लेकिन अवसर भी कम नहीं हैं।

अंततः, कांग्रेस को अपनी जड़ों की ओर लौटना होगा और उन सिद्धांतों और मूल्यों को फिर से स्थापित करना होगा जिन्होंने इसे एक समय देश की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक शक्ति बनाया था। आंतरिक लोकतंत्र को मजबूत करना और सभी आवाजों को सुनना ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है।

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Staff Reporter at VG Khabar.

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