बिलासपुर जिले में शैक्षणिक सत्र शुरू हुए काफी समय हो चुका है, लेकिन सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों बच्चों को अभी तक किताबें नहीं मिल पाई हैं।
यह स्थिति शिक्षा के अधिकार और बच्चों के भविष्य दोनों पर सवाल खड़े करती है।
स्कूलों में उपस्थिति दर्ज हो रही है, शिक्षक पढ़ा रहे हैं, लेकिन छात्रों के हाथों में पाठ्यपुस्तकें न होने से पढ़ाई का माहौल अधूरा और अप्रभावी बना हुआ है।Photo: Katerina Holmes / Pexelsयह समस्या केवल बिलासपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के कई अन्य जिलों में भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिल रही है।
अभिभावक और छात्र दोनों ही असमंजस में हैं कि बिना किताबों के वे कैसे पढ़ाई करें और आने वाली परीक्षाओं का सामना कैसे करें।
शिक्षकों को भी बिना पाठ्यपुस्तकों के पढ़ाना एक चुनौती भरा काम लग रहा है, क्योंकि वे पाठ्यक्रम को सही ढंग से आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं।पाठ्यपुस्तक वितरण में देरी का कारण: 70-80 GSM विवादइस गंभीर समस्या की जड़ में पाठ्यपुस्तकों के कागज़ की गुणवत्ता (GSM) को लेकर चल रहा विवाद है।