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तिरुवनंतपुरम, 27 मई 2026: केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आधिकारिक आगमन में देरी का सिलसिला जारी है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार दक्षिण-मध्य अरब सागर पर बादलों की गतिविधि कमज़ोर पड़ने और इस क्षेत्र में चक्रवाती परिसंचरण (cyclonic circulation) के बनने से मानसून की प्रगति धीमी हुई है।
चक्रवाती परिसंचरण ने केरल के पास नमी को कम कर दिया है और बारिश लाने वाले बादलों को कमज़ोर कर रहा है। हालाँकि अच्छी ख़बर है — अगले 2-3 दिनों में स्थिति में सुधार होने की संभावना है।
क्या हो रहा है?
26 मई की डेडलाइन चूकी: IMD का पहला अनुमान नया अनुमान: 2-4 जून के बीच आगमन; कुछ रिपोर्ट्स में 5-10 जून भी कारण: कमज़ोर हवाएँ, El Niño का प्रभाव, अरब सागर पर चक्रवाती परिसंचरण 2-3 दिनों में सुधार: मौसम विशेषज्ञों का अनुमान तकनीकी कारण — विशेषज्ञों की राय मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार वर्तमान में निम्न कारक मानसून की प्रगति को धीमा कर रहे हैं: चक्रवाती परिसंचरण: दक्षिण-मध्य अरब सागर पर एक चक्रवाती परिसंचरण ने नमी को सोख लिया है कमज़ोर क्रॉस-इक्वेटोरियल हवाएँ: हिंद महासागर से नमी का प्रवाह उतना तेज़ नहीं El Niño का प्रभाव: प्रशांत महासागर का यह जलवायु पैटर्न दक्षिण एशिया के मानसून को कमज़ोर कर रहा है एंटी-साइक्लोनिक प्रभाव: उत्तर भारत के ऊपर सूखी हवाओं का दबाव बना हुआ केरल में वर्तमान बारिश मानसून की आधिकारिक देरी के बावजूद केरल के तटीय और दक्षिणी ज़िलों में अभी भी बारिश सक्रिय है — यह मानसून-पूर्व बारिश है, आधिकारिक मानसून नहीं।