छत्तीसगढ़ की शान, पंडवानी गायिका पद्मविभूषण तीजन बाई को आज उनके पैतृक गांव गनियारी में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ सहित देशभर से आए हजारों लोग उनके अंतिम दर्शनों के लिए उमड़ पड़े, जिससे गनियारी गांव जनसैलाब में तब्दील हो गया।
कला और संस्कृति के एक युग का अंत हो गया, जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई दे रही है।Photo: Mehmet Turgut Kirkgoz / Pexelsतीजन बाई ने पंडवानी गायन शैली को अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिलाई।
उनकी ओजस्वी आवाज और महाभारत की कथाओं को जीवंत करने की अद्भुत क्षमता ने उन्हें अद्वितीय कलाकार बना दिया।
उन्होंने अपनी कला के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को विश्व पटल पर स्थापित किया, जिसके लिए देश-विदेश में उन्हें अनगिनत सम्मान और पुरस्कार मिले।एक युग का अंत: तीजन बाई का योगदानतीजन बाई का जीवन संघर्ष और साधना का प्रतीक रहा।