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तेलंगाना में 124 नक्सली करेंगे सरेंडर, सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता

तेलंगाना में 124 नक्सली करेंगे सरेंडर, PLGA बटालियन के लड़ाके भी शामिल; कई नक्सली छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में रहे सक्रिय।

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Author: Heshma Published: 7 Mar 2026, 5:28 PM Updated: 5 Jul 2026, 1:20 AM Views: 148
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हैदराबाद। तेलंगाना में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। जानकारी के अनुसार 124 नक्सली आज सुरक्षा बलों के सामने सरेंडर करने जा रहे हैं। इन नक्सलियों में प्रतिबंधित माओवादी संगठन की सशस्त्र शाखा पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) के कई लड़ाके भी शामिल बताए जा रहे हैं।

यह सरेंडर नक्सल विरोधी अभियान में सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार लंबे समय से सक्रिय कई नक्सलियों ने अब मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है।

PLGA बटालियन के सदस्य भी शामिल

सरेंडर करने वाले नक्सलियों में PLGA बटालियन के लड़ाके भी शामिल हैं, जो माओवादी संगठन की सैन्य इकाई मानी जाती है। यह इकाई जंगलों में सक्रिय होकर सुरक्षा बलों के खिलाफ हमले और अन्य गतिविधियों में शामिल रहती है।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार इन नक्सलियों का सरेंडर संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इससे नक्सली गतिविधियों को कमजोर करने में मदद मिल सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार चल रहे सुरक्षा अभियानों और सरकारी पुनर्वास नीतियों के कारण कई नक्सली अब हथियार छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में सक्रिय नक्सलियों की संख्या अधिक

जानकारी के अनुसार सरेंडर करने वाले कई नक्सली पहले छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय रहे हैं। खासकर बस्तर और आसपास के जंगलों में उनकी गतिविधियां देखी जाती रही हैं।

छत्तीसगढ़ लंबे समय से नक्सलवाद से प्रभावित राज्यों में शामिल रहा है। यहां के कई जिलों में नक्सलियों की गतिविधियां पहले काफी सक्रिय रही हैं।

हालांकि पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों के अभियान और विकास कार्यों के कारण कई नक्सली संगठनों की गतिविधियों में कमी देखने को मिली है।

सरेंडर नीति से बढ़ रही वापसी

सरकार की सरेंडर और पुनर्वास नीति का भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है। इस नीति के तहत हथियार छोड़ने वाले नक्सलियों को आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और पुनर्वास की सुविधाएं दी जाती हैं।

इससे कई नक्सली मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि सरकार का उद्देश्य केवल सुरक्षा अभियान चलाना ही नहीं बल्कि हिंसा के रास्ते से हटकर सामान्य जीवन की ओर लौटने के अवसर भी देना है।

सुरक्षा बलों के अभियान का असर

सुरक्षा बलों द्वारा लगातार चलाए जा रहे अभियान का असर भी नक्सली संगठनों पर दिखाई दे रहा है। जंगलों में सर्च ऑपरेशन, खुफिया जानकारी और आधुनिक तकनीक के उपयोग से नक्सलियों की गतिविधियों पर काफी हद तक नियंत्रण पाया गया है।

अधिकारियों का कहना है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास से भी स्थानीय लोगों का विश्वास बढ़ा है।

मुख्यधारा में लौटने की उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सामूहिक सरेंडर से नक्सलवाद को कमजोर करने में मदद मिलती है। जब बड़ी संख्या में नक्सली हथियार छोड़कर समाज में लौटते हैं तो यह शांति और विकास की दिशा में सकारात्मक संकेत माना जाता है।

सरकार और सुरक्षा एजेंसियां उम्मीद कर रही हैं कि आने वाले समय में और भी नक्सली संगठन छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होंगे।

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Heshma

Heshma is a journalist known for covering political developments, social issues, and breaking news. She is committed to delivering factual, clear, and engaging journalism for modern audiences.

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