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पुणे के फयाज प्रेमजी के 15,000 लोगों को मारने का सच खंगाल रही पुलिस: 1 साल में 19 बार गया ईरान-इराक, मोबाइल में मिले सबूत

पुणे पुलिस एक सनसनीखेज मामले की गहन जांच में जुटी हुई है, जिसमें पुणे के निवासी फयाज प्रेमजी पर 15,000 लोगों की हत्या में शामिल होने का आ...

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Author: Jagraj Published: 29 Jun 2026, 2:18 PM Updated: 29 Jun 2026, 8:00 PM Views: 4
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पुणे पुलिस एक सनसनीखेज मामले की गहन जांच में जुटी हुई है, जिसमें पुणे के निवासी फयाज प्रेमजी पर 15,000 लोगों की हत्या में शामिल होने का आरोप है। यह मामला तब सामने आया जब पुलिस को प्रेमजी के मोबाइल फोन से आपत्तिजनक सबूत मिले, जो उसकी संदिग्ध गतिविधियों की ओर इशारा करते हैं। जांच अधिकारियों के अनुसार, प्रेमजी ने पिछले एक साल में ईरान और इराक की 19 बार यात्राएं की हैं, जिसने पुलिस के संदेह को और गहरा कर दिया है।

Photo: 112 Uttar Pradesh / Pexels

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, प्रेमजी की लगातार विदेश यात्राएं और उसके मोबाइल से मिले डिजिटल साक्ष्य एक बड़े आपराधिक नेटवर्क से उसके संभावित संबंधों का संकेत दे रहे हैं। इन यात्राओं का उद्देश्य और उनके पीछे की मंशा क्या थी, यह अभी भी जांच का विषय है। पुलिस हर एंगल से मामले की पड़ताल कर रही है, जिसमें यह भी शामिल है कि क्या प्रेमजी किसी अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठन या मानव तस्करी रैकेट से जुड़ा हुआ है।

शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि प्रेमजी का जीवनशैली और उसके आर्थिक स्रोत भी संदिग्ध हैं। उसके पास आय का कोई स्पष्ट और वैध स्रोत नहीं होने के बावजूद वह महंगी यात्राएं कर रहा था। पुलिस ने उसके बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच शुरू कर दी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन यात्राओं का खर्च कौन उठा रहा था और इसके पीछे क्या मकसद था।

Photo: cottonbro studio / Pexels

पुलिस टीम ने प्रेमजी के मोबाइल फोन से बरामद डेटा का फॉरेंसिक विश्लेषण शुरू कर दिया है। इसमें चैट रिकॉर्ड, कॉल लॉग, तस्वीरें और वीडियो शामिल हैं जो इस पूरे मामले की गुत्थी सुलझाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। ऐसी आशंका है कि यह डेटा किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट के संचालन का खुलासा कर सकता है।

जांचकर्ताओं का मानना है कि '15,000 लोगों को मारने' का दावा किसी बड़े नरसंहार या युद्ध अपराध से संबंधित हो सकता है। ईरान और इराक जैसे युद्धग्रस्त क्षेत्रों में उसकी बार-बार यात्राएं इस संभावना को और बल देती हैं कि वह किसी सशस्त्र संघर्ष या चरमपंथी गतिविधियों में शामिल रहा होगा। हालांकि, पुलिस अभी तक किसी निश्चित निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है और सभी संभावित परिदृश्यों पर विचार कर रही है।

Photo: cottonbro studio / Pexels

पुणे पुलिस ने इस मामले में केंद्रीय एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय खुफिया संगठनों से भी संपर्क साधा है। चूंकि यह मामला अंतरराष्ट्रीय आयामों वाला प्रतीत होता है, इसलिए विभिन्न देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग आवश्यक होगा। यह सुनिश्चित करने के लिए कि सभी प्रासंगिक जानकारी साझा की जाए और अपराधी को न्याय के कटघरे में खड़ा किया जा सके।

प्रेमजी के पड़ोसियों और परिचितों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि उसके व्यक्तित्व, गतिविधियों और सामाजिक दायरे के बारे में अधिक जानकारी जुटाई जा सके। पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि क्या उसने कभी अपनी यात्राओं या किसी संदिग्ध गतिविधि के बारे में किसी से बात की थी। उसके पिछले रिकॉर्ड और पृष्ठभूमि की भी गहनता से जांच की जा रही है।

इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए, पुणे पुलिस ने अत्यधिक गोपनीयता बरती है। हालांकि, जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, और अधिक विवरण सामने आने की उम्मीद है। पुलिस ने जनता से भी अपील की है कि यदि किसी के पास फयाज प्रेमजी या उसकी गतिविधियों के बारे में कोई जानकारी है, तो वे तुरंत पुलिस से संपर्क करें।

यह घटना पुणे जैसे शांतिपूर्ण शहर में अंतरराष्ट्रीय अपराध के संभावित लिंक को उजागर करती है। यह दर्शाता है कि कैसे वैश्विक अपराध नेटवर्क स्थानीय स्तर पर भी अपनी जड़ें जमा सकते हैं। पुलिस इस मामले को अत्यंत गंभीरता से ले रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सत्य सामने आए और किसी भी प्रकार के अपराध में शामिल लोगों को दंडित किया जा सके।

आगे की जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि क्या प्रेमजी अकेला काम कर रहा था या वह किसी बड़े समूह का हिस्सा था। उसके मोबाइल से मिले सबूतों में अन्य व्यक्तियों के नाम या संपर्क भी हो सकते हैं, जिनकी पहचान कर उनसे पूछताछ की जाएगी। यह एक जटिल मामला है जिसमें कई परतें हो सकती हैं जिन्हें सुलझाने में समय लगेगा।

पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक सभी आरोप साबित नहीं हो जाते, तब तक फयाज प्रेमजी को निर्दोष माना जाएगा। हालांकि, उसकी संदिग्ध यात्राएं और मोबाइल से मिले सबूत उसे जांच के केंद्र में रखते हैं। इस मामले का परिणाम न केवल पुणे बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।

जांच दल इस बात पर भी गौर कर रहा है कि क्या प्रेमजी को किसी विशेष विचारधारा या समूह द्वारा कट्टरपंथी बनाया गया था। ईरान और इराक की यात्राएं अक्सर ऐसे व्यक्तियों द्वारा की जाती हैं जो संघर्ष क्षेत्रों में किसी न किसी रूप में शामिल होते हैं। यह एक गंभीर पहलू है जिसकी गहराई से जांच की आवश्यकता है।

पुणे पुलिस का मानना है कि इस मामले में कई और खुलासे होने बाकी हैं। वे सभी उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं ताकि इस रहस्य को सुलझाया जा सके और '15,000 लोगों को मारने' के पीछे की सच्चाई को उजागर किया जा सके। यह एक चुनौती भरा कार्य है, लेकिन पुलिस दृढ़ संकल्पित है।

यह मामला एक महत्वपूर्ण अनुस्मारक है कि कैसे डिजिटल फुटप्रिंट और यात्रा इतिहास किसी व्यक्ति की संदिग्ध गतिविधियों को उजागर कर सकते हैं। आधुनिक फोरेंसिक उपकरण और तकनीकों का उपयोग करके, पुलिस अब ऐसे जटिल मामलों को सुलझाने में अधिक सक्षम है जो पहले असंभव लगते थे।

अंतर्राष्ट्रीय संबंध और सुरक्षा चिंताएं

फयाज प्रेमजी के मामले में अंतर्राष्ट्रीय संबंध और सुरक्षा चिंताएं भी बढ़ गई हैं। ईरान और इराक की बार-बार यात्राएं, विशेष रूप से ऐसे समय में जब इन क्षेत्रों में राजनीतिक अस्थिरता और संघर्ष जारी है, भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय है। यह मामला भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा पर संभावित प्रभावों के बारे में गंभीर सवाल उठाता है।

डिजिटल साक्ष्य की भूमिका

इस जांच में डिजिटल साक्ष्य की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रेमजी के मोबाइल फोन से बरामद डेटा, जिसमें संचार रिकॉर्ड, स्थान डेटा और अन्य डिजिटल सामग्री शामिल है, जांच को सही दिशा में ले जाने में अहम साबित हो रहा है। यह मामला साइबर फोरेंसिक की बढ़ती महत्ता को भी रेखांकित करता है।

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Jagraj

Staff Reporter at VG Khabar.

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