महिलाओं की आर्थिक भागीदारी में बड़ा बदलाव
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को लेकर महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए। उन्होंने कहा कि आज भारत में महिलाओं के पास 28 करोड़ से अधिक जनधन खाते हैं, जो यह दर्शाता है कि देश में वित्तीय समावेशन के माध्यम से महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
वित्त मंत्री ने कहा कि जब महिलाओं को वित्तीय सेवाओं और संसाधनों तक पहुंच मिलती है तो वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनती हैं। जनधन योजना जैसी पहल ने देश के दूरदराज क्षेत्रों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाई हैं और लाखों महिलाओं को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
प्रधानमंत्री जनधन योजना का बढ़ता प्रभाव
प्रधानमंत्री जनधन योजना (PMJDY) भारत सरकार की एक प्रमुख वित्तीय समावेशन योजना है, जिसका उद्देश्य देश के हर नागरिक को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ना है। यह योजना वर्ष 2014 में शुरू की गई थी और इसके माध्यम से बचत खाते, बीमा, पेंशन और अन्य वित्तीय सुविधाओं तक आसान पहुंच सुनिश्चित की गई।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश में अब तक 57 करोड़ से अधिक जनधन खाते खोले जा चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या महिलाओं की है। इन खातों ने गरीब और ग्रामीण परिवारों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
वित्त मंत्री के अनुसार, महिलाओं के नाम पर बड़ी संख्या में खाते खुलना इस बात का संकेत है कि देश में आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में सकारात्मक बदलाव हो रहा है।
ग्रामीण महिलाओं को मिल रहा लाभ
जनधन योजना का सबसे अधिक लाभ ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं को मिला है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस योजना के अंतर्गत खोले गए खातों में से बड़ी संख्या ग्रामीण क्षेत्रों में है और इन खातों में महिलाओं की हिस्सेदारी उल्लेखनीय है।
इन खातों के माध्यम से सरकार की कई कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचाया जा रहा है। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ी है बल्कि बिचौलियों की भूमिका भी कम हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच मिलने से महिलाओं को बचत करने, छोटे व्यवसाय शुरू करने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है।
‘लखपति दीदी’ जैसी योजनाओं से सशक्तिकरण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जनधन योजना के साथ-साथ “लखपति दीदी” जैसी योजनाएं भी महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में मदद कर रही हैं। इस पहल के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ने की सुविधा दी जाती है।
इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाना और उन्हें छोटे व्यवसायों तथा उद्यमिता के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना है। सरकार का लक्ष्य है कि लाखों महिलाएं सालाना एक लाख रुपये या उससे अधिक की आय अर्जित कर सकें।
महिलाओं की भूमिका से मजबूत हो रहा देश
वित्त मंत्री ने कहा कि आज महिलाएं न केवल आर्थिक गतिविधियों में भाग ले रही हैं बल्कि देश के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उद्यमिता, विज्ञान, शिक्षा, खेल और प्रशासन जैसे कई क्षेत्रों में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि “नारी शक्ति” नए भारत के निर्माण की मजबूत आधारशिला है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के लिए नए अवसर पैदा करने के लिए कई ठोस कदम उठाए गए हैं।
वित्तीय स्वतंत्रता से सामाजिक बदलाव
विशेषज्ञों का मानना है कि जब महिलाओं के पास बैंक खाते और वित्तीय संसाधनों तक पहुंच होती है, तो इसका असर केवल आर्थिक स्थिति पर ही नहीं बल्कि सामाजिक जीवन पर भी पड़ता है।
महिलाओं के बैंक खातों के माध्यम से सरकारी योजनाओं की राशि सीधे पहुंचने से परिवारों की आर्थिक स्थिति बेहतर होती है। इससे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण जैसे क्षेत्रों में भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है।