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फ्लाइट मुफ्त सीट फैसले पर रोक

फ्लाइट में 60% सीटें मुफ्त देने के फैसले पर रोक, एयरलाइंस की आपत्ति के बाद सरकार ने 15 दिन में बदला निर्णय।

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Author: Simran Published: 3 Apr 2026, 3:50 PM Updated: 5 Jul 2026, 10:18 AM Views: 111
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फ्लाइट में 60 प्रतिशत सीटें मुफ्त देने के फैसले पर सरकार ने फिलहाल रोक लगा दी है। यह निर्णय केवल 15 दिनों के भीतर बदल दिया गया, जब कई एयरलाइंस कंपनियों ने इस प्रस्ताव पर गंभीर आपत्ति जताई थी। एयरलाइंस का कहना था कि इस तरह का नियम लागू होने से उनकी वित्तीय स्थिति पर बड़ा असर पड़ेगा और परिचालन लागत संभालना मुश्किल हो जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने इस फैसले की समीक्षा के बाद इसे फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया है। मंत्रालय ने कहा है कि सभी हितधारकों से चर्चा के बाद ही इस मामले में अंतिम फैसला लिया जाएगा।

15 दिन पहले जारी हुआ था आदेश

करीब 15 दिन पहले सरकार ने एक प्रस्ताव जारी किया था, जिसमें फ्लाइट की 60 प्रतिशत सीटें मुफ्त या रियायती दरों पर देने की बात कही गई थी। इस प्रस्ताव का उद्देश्य कुछ विशेष श्रेणियों के यात्रियों को राहत देना बताया गया था। हालांकि इस प्रस्ताव के सामने आते ही एयरलाइंस कंपनियों ने चिंता जतानी शुरू कर दी थी।

नागर विमानन महानिदेशालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव को लागू करने से पहले एयरलाइंस कंपनियों की राय ली गई थी, लेकिन कंपनियों ने स्पष्ट तौर पर इसे व्यावहारिक नहीं बताया।

एयरलाइंस कंपनियों ने जताई आपत्ति

देश की प्रमुख एयरलाइंस कंपनियों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया। इंडिगो, एयर इंडिया और स्पाइसजेट सहित कई एयरलाइंस ने कहा कि 60 प्रतिशत सीटें मुफ्त देने से उनके राजस्व पर भारी असर पड़ेगा।

एयरलाइंस कंपनियों ने सरकार को बताया कि पहले से ही ईंधन की बढ़ती कीमतें, एयरपोर्ट शुल्क और अन्य परिचालन लागत उन्हें प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में मुफ्त सीटों की संख्या बढ़ाना कंपनियों के लिए घाटे का सौदा साबित हो सकता है।

कंपनियों ने यह भी कहा कि अगर इस फैसले को लागू किया गया तो टिकट की बाकी सीटों की कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं, जिससे सामान्य यात्रियों पर बोझ बढ़ेगा।

सरकार ने लिया यू-टर्न

एयरलाइंस कंपनियों की आपत्तियों के बाद सरकार ने इस फैसले पर पुनर्विचार किया और फिलहाल इसे स्थगित कर दिया। मंत्रालय ने कहा कि इस मामले में विस्तृत चर्चा के बाद ही नया फैसला लिया जाएगा।

सरकार का मानना है कि यात्रियों को राहत देना जरूरी है, लेकिन साथ ही एयरलाइंस उद्योग की वित्तीय स्थिरता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसलिए संतुलित नीति तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।

यात्रियों और उद्योग दोनों पर असर

विशेषज्ञों का कहना है कि 60 प्रतिशत सीटें मुफ्त देने का फैसला लागू होता तो इसका असर पूरे विमानन उद्योग पर पड़ता। इससे टिकट संरचना में बदलाव होता और एयरलाइंस कंपनियों को घाटे का सामना करना पड़ सकता था।

वहीं, कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि सीमित स्तर पर रियायत देना संभव है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में मुफ्त सीटें देना व्यावहारिक नहीं है।

नई नीति पर होगी चर्चा

सरकार अब इस मुद्दे पर नई नीति बनाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए एयरलाइंस कंपनियों, विमानन विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव लिए जाएंगे। इसके बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार यात्रियों को राहत देने के लिए वैकल्पिक उपायों पर भी विचार कर रही है। इनमें सीमित संख्या में रियायती सीटें या विशेष श्रेणी के यात्रियों के लिए अलग व्यवस्था शामिल हो सकती है।

विमानन क्षेत्र के लिए अहम फैसला

यह फैसला विमानन क्षेत्र के लिए अहम माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में विमानन उद्योग कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में नई नीतियों का प्रभाव सीधे कंपनियों और यात्रियों दोनों पर पड़ता है।

सरकार द्वारा 15 दिन में निर्णय बदलना इस बात का संकेत है कि विमानन क्षेत्र से जुड़े फैसलों में सभी पक्षों की राय को महत्व दिया जा रहा है।

अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार नई नीति में क्या बदलाव करती है और यात्रियों को किस तरह की राहत मिलती है।

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Simran

Simran is a passionate journalist who reports on politics, public policy, and social issues. Her work focuses on delivering reliable news, in-depth insights, and timely updates to readers.

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