26 जून 2026 को कोलकाता और जयपुर सहित देश के कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश ने सामान्य जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। इन दोनों प्रमुख शहरों में भारी वर्षा के कारण सड़कें पूरी तरह से जलमग्न हो गईं, जिससे यातायात ठप हो गया और लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। शहरी इलाकों में जलजमाव की स्थिति इतनी गंभीर थी कि कई अस्पताल और दुकानें पानी में डूब गए, जिससे आवश्यक सेवाओं पर भी असर पड़ा।
Photo: Sebastiaan Stam / Pexelsकोलकाता में, सुबह से शुरू हुई लगातार बारिश ने शहर के निचले इलाकों को विशेष रूप से प्रभावित किया। एमजी रोड, धर्मतला और हावड़ा ब्रिज के आसपास के क्षेत्रों में घुटनों तक पानी भर गया। कई प्रमुख अस्पतालों के परिसर और भूतल पानी से भर गए, जिससे मरीजों और कर्मचारियों को भारी परेशानी हुई। स्थानीय व्यापारियों ने बताया कि उनकी दुकानों में पानी घुसने से लाखों रुपये का सामान खराब हो गया।
जयपुर में भी स्थिति कुछ ऐसी ही थी। शहर के परकोटा क्षेत्र, मानसरोवर और वैशाली नगर जैसे इलाकों में सड़कें दरिया बन गईं। अचानक हुई तेज बारिश के कारण ड्रेनेज सिस्टम ओवरफ्लो हो गए और पानी घरों और दुकानों में घुस गया। कुछ स्थानों पर वाहनों के पानी में फंसने से लंबा जाम लग गया, और स्कूल व कार्यालय जाने वाले लोगों को घंटों देरी का सामना करना पड़ा।
मध्य प्रदेश में भी भारी बारिश का कहर जारी है, खासकर इंदौर में। पर्यटन विभाग के अनुसार, इंदौर के आसपास के लगभग 15 प्रमुख पर्यटन स्थल भारी बारिश और बाढ़ जैसी स्थिति के कारण पर्यटकों के लिए बंद कर दिए गए हैं। इनमें कई झरने, पिकनिक स्पॉट और ऐतिहासिक स्थल शामिल हैं, जहाँ सुरक्षा कारणों से आवाजाही प्रतिबंधित कर दी गई है। स्थानीय प्रशासन ने पर्यटकों और निवासियों को इन क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी है।
मौसम विभाग ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र और राजस्थान के ऊपर एक पश्चिमी विक्षोभ के कारण इन क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश हुई है। अगले 24 घंटों में भी कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना व्यक्त की गई है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है। नागरिकों को सतर्क रहने और आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
Photo: Nikita Korchagin / Pexelsकोलकाता और जयपुर दोनों ही शहरों में नगर निगम और आपदा प्रबंधन टीमें सक्रिय हो गई हैं। जलजमाव वाले क्षेत्रों से पानी निकालने के लिए पंप लगाए जा रहे हैं, और प्रभावित लोगों को सहायता प्रदान की जा रही है। हालांकि, व्यापक जलजमाव और लगातार बारिश के कारण राहत कार्यों में बाधा आ रही है।
इस मानसूनी बारिश ने शहरी नियोजन और जल निकासी प्रणालियों की खामियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। विशेषज्ञ बताते हैं कि तेजी से अनियोजित शहरीकरण और अतिक्रमण के कारण प्राकृतिक जल निकासी चैनलों के अवरुद्ध होने से ऐसी स्थिति हर साल बनती है।
सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को स्थिति पर कड़ी निगरानी रखने और प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता सुनिश्चित करने के लिए कहा है।
नागरिकों से अपील की गई है कि वे अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें, बिजली के खंभों और तारों से दूर रहें, और जलभराव वाले इलाकों से गुजरने से बचें। आपदा हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं ताकि लोग किसी भी आपात स्थिति में संपर्क कर सकें।
आने वाले दिनों में मौसम में सुधार की उम्मीद है, लेकिन तब तक इन शहरों में जनजीवन के सामान्य होने में कुछ समय लग सकता है। प्रशासन और जनता दोनों को मिलकर इस चुनौती का सामना करना होगा।