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महानदी विवाद ट्रिब्यूनल का कार्यकाल बढ़ा

Mahanadi River जल बंटवारा विवाद में ट्रिब्यूनल का कार्यकाल 9 महीने बढ़ा, 44 साल पुराने मामले में 2027 तक फैसले की उम्मीद।

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Author: Simran Published: 11 Apr 2026, 6:32 PM Updated: 5 Jul 2026, 2:12 AM Views: 86
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छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से जारी जल विवाद पर फिर बढ़ी समय सीमा

छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चल रहे महानदी जल बंटवारा विवाद में एक बार फिर समय सीमा बढ़ा दी गई है। केंद्र सरकार ने महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल का कार्यकाल 9 महीने के लिए बढ़ा दिया है। अब इस बहुप्रतीक्षित मामले में 2027 तक अंतिम फैसला आने की उम्मीद जताई जा रही है।

महानदी जल बंटवारे को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच पिछले चार दशकों से विवाद जारी है। यह मामला करीब 44 साल पुराना बताया जा रहा है, जिसमें दोनों राज्यों ने अपने-अपने दावे पेश किए हैं।

ट्रिब्यूनल को मिला 9 महीने का अतिरिक्त समय

केंद्र सरकार ने महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल का कार्यकाल बढ़ाने का निर्णय लिया है। अधिकारियों के अनुसार, मामले की जटिलता और दोनों राज्यों के दावों की विस्तृत जांच के कारण ट्रिब्यूनल को अतिरिक्त समय की आवश्यकता पड़ी।

महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल अब अगले 9 महीनों में सुनवाई पूरी कर अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगा।

सूत्रों के अनुसार, ट्रिब्यूनल तकनीकी रिपोर्ट, जल प्रवाह डेटा और परियोजनाओं के प्रभाव का अध्ययन कर रहा है।

44 साल पुराना विवाद

महानदी जल बंटवारा विवाद कई दशक पुराना है। दोनों राज्यों के बीच पानी के उपयोग, बांध निर्माण और जल प्रवाह को लेकर मतभेद रहे हैं।

छत्तीसगढ़ का कहना है कि राज्य के भीतर विकास कार्यों के लिए जल का उपयोग करना उसका अधिकार है। वहीं ओडिशा ने आरोप लगाया है कि छत्तीसगढ़ में बनाए जा रहे बांधों से उसके हिस्से का पानी कम हो रहा है।

इस विवाद के चलते कई बार दोनों राज्यों के बीच राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी तनाव की स्थिति बनी है।

बांध और परियोजनाएं बनीं विवाद की वजह

विवाद का मुख्य कारण महानदी पर बनाए जा रहे बांध और जल परियोजनाएं हैं।

छत्तीसगढ़ में कई बैराज और एनीकट निर्माण किए गए हैं, जिन पर ओडिशा ने आपत्ति जताई है। ओडिशा का कहना है कि इन परियोजनाओं से नीचे की ओर जल प्रवाह प्रभावित हो रहा है।

छत्तीसगढ़ सरकार का कहना है कि सभी परियोजनाएं नियमों के तहत बनाई गई हैं और इससे किसी राज्य को नुकसान नहीं होगा।

दोनों राज्यों ने पेश किए अपने-अपने तर्क

ट्रिब्यूनल में दोनों राज्यों ने अपने-अपने पक्ष रखे हैं।

छत्तीसगढ़ का तर्क:

  • राज्य को विकास के लिए जल की जरूरत
  • परियोजनाएं नियमों के तहत बनाई गईं
  • जल प्रवाह प्रभावित नहीं हुआ

ओडिशा का तर्क:

  • जल प्रवाह कम हुआ
  • कृषि और पेयजल पर असर
  • पर्यावरणीय चिंता

इन मुद्दों पर ट्रिब्यूनल सुनवाई कर रहा है।

किसानों और उद्योगों पर असर

महानदी जल विवाद का असर दोनों राज्यों के किसानों और उद्योगों पर भी पड़ रहा है।

ओडिशा में कई क्षेत्रों में सिंचाई के लिए महानदी का पानी महत्वपूर्ण है। वहीं छत्तीसगढ़ में भी कृषि और औद्योगिक परियोजनाओं के लिए पानी की जरूरत बढ़ रही है।

इस कारण विवाद का समाधान दोनों राज्यों के लिए जरूरी माना जा रहा है।

केंद्र सरकार की भूमिका

केंद्र सरकार इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रही है।

जल शक्ति मंत्रालय के तहत इस मामले की निगरानी की जा रही है।

सरकार ने उम्मीद जताई है कि ट्रिब्यूनल जल्द ही अंतिम निर्णय देगा।

2027 में फैसले की उम्मीद

ट्रिब्यूनल का कार्यकाल बढ़ने के बाद अब 2027 तक फैसला आने की संभावना जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम निर्णय से दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद समाप्त हो सकता है।

राजनीतिक महत्व भी बढ़ा

महानदी विवाद राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

दोनों राज्यों में यह मुद्दा कई बार चुनावी बहस का हिस्सा भी रहा है।

जल बंटवारे का मामला जनता से सीधे जुड़ा होने के कारण इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

समाधान से मिलेगा बड़ा फायदा

यदि विवाद का समाधान हो जाता है, तो दोनों राज्यों को कई लाभ मिल सकते हैं:

  • सिंचाई व्यवस्था मजबूत होगी
  • पेयजल समस्या कम होगी
  • औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा
  • राज्यों के बीच सहयोग बढ़ेगा

इससे क्षेत्रीय विकास को गति मिल सकती है।

निष्कर्ष

महानदी जल बंटवारा विवाद में ट्रिब्यूनल का कार्यकाल 9 महीने बढ़ाया जाना इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है। 44 साल पुराने इस विवाद में 2027 तक फैसले की उम्मीद है। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के लिए यह निर्णय बेहद महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि इससे जल संसाधनों के उपयोग को लेकर स्पष्टता आएगी और दोनों राज्यों के विकास को नई दिशा मिल सकती है।

S

Simran

Simran is a passionate journalist who reports on politics, public policy, and social issues. Her work focuses on delivering reliable news, in-depth insights, and timely updates to readers.

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