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मुंबई में बारिश बनी आफत: तीन मंजिला इमारत ढहने से 6 की मौत, कई फंसे

मुंबई में मानसून की पहली भारी बारिश ने एक बार फिर शहर की कमजोर बुनियादी ढांचे की पोल खोल दी है। सोमवार शाम को हुई मूसलाधार बारिश के बाद श...

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Author: Jagraj Published: 6 Jul 2026, 1:45 PM Updated: 24 Jul 2026, 2:40 AM Views: 4
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मुंबई में मानसून की पहली भारी बारिश ने एक बार फिर शहर की कमजोर बुनियादी ढांचे की पोल खोल दी है। सोमवार शाम को हुई मूसलाधार बारिश के बाद शहर के एक घनी आबादी वाले इलाके में एक तीन मंजिला आवासीय इमारत ढह गई, जिसमें कम से कम छह लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। यह घटना मुंबई में बारिश के मौसम के दौरान होने वाली त्रासदियों की एक लंबी श्रृंखला में नवीनतम कड़ी है, जो हर साल सैकड़ों लोगों की जान ले लेती है।

Photo: Rafijul Momin / Pexels

स्थानीय प्रशासन और आपदा राहत टीमों के अनुसार, यह हादसा देर शाम हुआ जब इमारत अपने आप ढह गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि ढहने की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के लोग दहशत में आ गए। सूचना मिलते ही राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), अग्निशमन विभाग और स्थानीय पुलिस की टीमें तुरंत घटनास्थल पर पहुंचीं।

बचाव अभियान जारी, मलबे में और लोगों के फंसे होने की आशंका

बचाव अभियान रात भर जारी रहा और सुबह तक मलबे से छह शव निकाले जा चुके थे। अधिकारियों ने आशंका जताई है कि मलबे के नीचे अभी भी कई लोग फंसे हो सकते हैं, जिससे मरने वालों की संख्या बढ़ने की संभावना है। बचावकर्मी अत्याधुनिक उपकरणों और स्निफर डॉग्स की मदद से मलबे को हटाने और फंसे हुए लोगों का पता लगाने का काम कर रहे हैं। हालांकि, लगातार बारिश और संकरी गलियों के कारण बचाव कार्यों में बाधा आ रही है।

Photo: Roman Saienko / Pexels

इलाके के निवासियों ने बताया कि यह इमारत काफी पुरानी थी और इसकी मरम्मत की आवश्यकता थी। कई बार स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से इसकी जर्जर हालत को लेकर शिकायत भी की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस तरह की घटनाएं अक्सर मुंबई में मानसून के दौरान सामने आती हैं, जहां कई इमारतें अपनी निर्धारित आयु सीमा पार कर चुकी हैं और किसी भी समय ढहने का खतरा बना रहता है।

मुंबई में हर साल मानसून के दौरान भारी बारिश से जुड़ी घटनाएं, जैसे कि इमारत ढहना, भूस्खलन और जलभराव, आम बात हो गई हैं। शहर की पुरानी और कमजोर इमारतों के साथ-साथ अनियोजित शहरीकरण और जल निकासी प्रणालियों की कमी इन त्रासदियों को और बढ़ा देती है। सरकार और स्थानीय निकाय द्वारा किए गए प्रयासों के बावजूद, समस्या का स्थायी समाधान अभी तक नहीं निकल पाया है।

Photo: Hiren Lad / Pexels

इस घटना ने एक बार फिर शहर के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशासन को पुरानी और खतरनाक इमारतों की पहचान कर उन्हें खाली कराने और ध्वस्त करने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए। इसके साथ ही, नई निर्माण परियोजनाओं में गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने घटना पर दुख व्यक्त किया है और मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने अधिकारियों को बचाव अभियान में तेजी लाने और घायलों को हर संभव चिकित्सा सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया है। सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे की घोषणा भी की है।

यह घटना मुंबई के निवासियों के लिए एक दुखद अनुस्मारक है कि मानसून का मौसम अपने साथ केवल राहत ही नहीं, बल्कि जानलेवा चुनौतियां भी लेकर आता है। शहर को ऐसी त्रासदियों से बचाने के लिए दीर्घकालिक योजना और प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता है। जब तक इन मुद्दों का समाधान नहीं किया जाता, तब तक हर बारिश का मौसम मुंबई के लिए एक संभावित आपदा का रूप ले सकता है।

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Staff Reporter at VG Khabar.

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