रायपुर। छत्तीसगढ़ में किसानों के लिए एक नई उम्मीद जगी है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV), रायपुर ने राज्य में सूरजमुखी की खेती को बढ़ावा देने के लिए 16 नई हाइब्रिड किस्मों का परीक्षण शुरू किया है। यह पहल किसानों को अधिक उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सूरजमुखी की खेती से किसानों को तेल फसलों में अधिक लाभ प्राप्त होगा। इसके अलावा, यह फसल जलवायु परिवर्तन के अनुकूल और कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देती है, जिससे सूखे प्रभावित क्षेत्रों में भी खेती संभव है।
IGKV में हाइब्रिड किस्मों का परीक्षण
IGKV के वैज्ञानिकों ने राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में 16 हाइब्रिड सूरजमुखी किस्मों का परीक्षण शुरू किया है। इन किस्मों को विशेष रूप से छत्तीसगढ़ की मिट्टी और जलवायु के अनुसार विकसित किया गया है।
परीक्षण का उद्देश्य है:
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अधिक तेल उत्पादन क्षमता वाली किस्में खोजना
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कम पानी और सीमित संसाधनों में बेहतर उपज देने वाली किस्में विकसित करना
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रोग प्रतिरोधक और टिकाऊ किस्मों का चयन
विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों का कहना है कि सफल परीक्षणों के बाद किसानों को यह बीज सीधे उपलब्ध कराया जाएगा।
किसानों के लिए लाभ
सूरजमुखी की खेती से किसानों को कई लाभ मिल सकते हैं:
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तेल उत्पादन में वृद्धि: हाइब्रिड किस्मों से सामान्य बीज की तुलना में तेल उत्पादन अधिक होता है।
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कम लागत में अधिक लाभ: सूरजमुखी कम रखरखाव वाली फसल है और इसका बीज बाजार में उच्च मूल्य पर बिकता है।
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जलवायु अनुकूल फसल: यह फसल सूखे और गर्म मौसम में भी अच्छी उपज देती है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सूरजमुखी की खेती से किसानों की आय में वृद्धि हो सकती है और राज्य में तेल फसलों की उत्पादन क्षमता भी बढ़ सकती है।
IGKV का योगदान
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने पहले भी राज्य में तेल फसलों और हाइब्रिड बीजों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सूरजमुखी की नई हाइब्रिड किस्मों के परीक्षण से किसानों को बेहतर गुणवत्ता, रोग प्रतिरोधक और उच्च उत्पादन वाली फसलें उपलब्ध होंगी।
विश्वविद्यालय ने किसानों के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए हैं ताकि वे नई तकनीकों और उन्नत किस्मों का सही तरीके से इस्तेमाल कर सकें।
राज्य में सूरजमुखी की खेती की संभावनाएं
छत्तीसगढ़ में सूरजमुखी की खेती के लिए कई क्षेत्र उपयुक्त हैं। राज्य के दक्षिणी और मध्य क्षेत्रों में मिट्टी और जलवायु सूरजमुखी की खेती के अनुकूल मानी जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हाइब्रिड किस्मों का व्यापक स्तर पर उपयोग किया जाए तो राज्य में तेल उत्पादन में 30 से 40 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव है।
किसानों की प्रतिक्रिया
किसानों ने इस पहल का स्वागत किया है। कई किसानों का कहना है कि सूरजमुखी की खेती उनके लिए नई आय का स्रोत बन सकती है।
किसान प्रतिनिधियों का कहना है कि अगर राज्य सरकार और विश्वविद्यालय बीज और प्रशिक्षण उपलब्ध कराते हैं, तो सूरजमुखी की खेती तेजी से बढ़ सकती है।
भविष्य की योजनाएं
IGKV और राज्य कृषि विभाग मिलकर यह योजना आगे बढ़ा रहे हैं। आने वाले समय में विश्वविद्यालय अधिक हाइब्रिड किस्मों का परीक्षण और उन्नत बीज वितरण करेगा।
इसके अलावा किसानों के लिए तकनीकी सहायता, जैविक उर्वरक और कीटनाशक के प्रयोग की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी।