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Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में 12 नक्‍सलियों ने किया आत्मसमर्पण, मुख्यधारा में लौटे

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में शांति बहाली के प्रयासों को एक और सफलता मिली है।

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Author: Jagraj Published: 26 Jun 2026, 10:14 PM Updated: 5 Jul 2026, 2:52 PM Views: 42
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छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में शांति बहाली के प्रयासों को एक और सफलता मिली है। राज्य के सुरक्षा बलों के समक्ष 12 सक्रिय नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है। यह घटना राज्य सरकार की आत्मसमर्पण नीति और पुलिस के सामुदायिक आउटरीच कार्यक्रमों की प्रभावशीलता को दर्शाती है। इन नक्सलियों ने समाज की मुख्यधारा में लौटने की इच्छा व्यक्त की है और हिंसा का मार्ग त्यागने का संकल्प लिया है।

Photo: Mustafa Fatemi / Pexels

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में विभिन्न रैंक के सदस्य शामिल हैं, जिनमें कुछ ऐसे भी हैं जिन पर छोटे इनाम घोषित थे। उन्होंने पुलिस अधिकारियों के सामने अपने हथियार और गोला-बारूद भी जमा किए। अधिकारियों ने बताया कि ये नक्सली पिछले कई वर्षों से विभिन्न हिंसक गतिविधियों में शामिल थे, जिनमें सुरक्षा बलों पर हमले, सड़क निर्माण में बाधा डालना और स्थानीय लोगों को धमकाना शामिल है।

पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने इस आत्मसमर्पण को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह घटना क्षेत्र में शांति और विकास लाने के लिए सुरक्षा बलों की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। डीजीपी ने यह भी दोहराया कि सरकार उन सभी नक्सलियों के लिए हमेशा तैयार है जो हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन जीना चाहते हैं।

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास नीति के तहत लाभ प्रदान किए जाएंगे। इस नीति में वित्तीय सहायता, व्यावसायिक प्रशिक्षण और आवास की सुविधा शामिल है ताकि वे समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त कर सकें। इसका उद्देश्य उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें फिर से अपराध की दुनिया में जाने से रोकना है।

यह आत्मसमर्पण ऐसे समय में हुआ है जब छत्तीसगढ़ सरकार नक्सलवाद को समाप्त करने और प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इन प्रयासों में नई सड़कें बनाना, स्कूल खोलना, स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना शामिल है।

Photo: Rohan Dewangan / Pexels

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आत्मसमर्पण अन्य नक्सलियों को भी हिंसा छोड़ने और शांतिपूर्ण जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे। यह दिखाता है कि सुरक्षा बलों का दबाव और सरकार की कल्याणकारी योजनाएं मिलकर नक्सलियों को आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर कर रही हैं।

पिछले कुछ वर्षों में, छत्तीसगढ़ में नक्सली हिंसा में उल्लेखनीय कमी आई है। इसका श्रेय सुरक्षा बलों की आक्रामक रणनीति, खुफिया जानकारी में सुधार और स्थानीय आबादी के साथ बेहतर तालमेल को दिया जाता है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की संख्या में वृद्धि इस बात का स्पष्ट संकेत है कि नक्सली आंदोलन अपनी पकड़ खो रहा है।

स्थानीय प्रशासन ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के परिवारों से भी संपर्क किया है ताकि उन्हें इस प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। परिवारों का समर्थन अक्सर नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इस घटना से क्षेत्र में विकास परियोजनाओं को और गति मिलने की उम्मीद है। जब तक नक्सली खतरा बना रहता है, तब तक बुनियादी ढांचे के विकास और सामाजिक कल्याण योजनाओं को पूरी तरह से लागू करना मुश्किल होता है। अधिक आत्मसमर्पण से इन क्षेत्रों में स्थिरता आएगी।

हालांकि, अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अभी भी बहुत काम किया जाना बाकी है। नक्सलवाद पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है, और सुरक्षा बलों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। फिर भी, यह आत्मसमर्पण एक सकारात्मक कदम है जो छत्तीसगढ़ को शांति और समृद्धि की ओर ले जाएगा।

सरकार ने एक बार फिर दोहराया है कि जो भी नक्सली हिंसा छोड़कर आत्मसमर्पण करेगा, उसे उचित सम्मान और पुनर्वास मिलेगा। यह एक खुला निमंत्रण है उन सभी के लिए जो बंदूक छोड़कर कलम और हल उठाना चाहते हैं।

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Jagraj

Staff Reporter at VG Khabar.

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