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Chhattisgarh

डाक देने 30 किलोमीटर भटक रहे शिक्षक

डाक व्यवस्था की खामियों के कारण शिक्षकों को 30 किलोमीटर दूर जाकर डाक देने को मजबूर होना पड़ रहा, व्यवस्था पर उठे सवाल।

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Author: Simran Published: 6 Apr 2026, 3:38 PM Updated: 18 May 2026, 7:37 PM Views: 47
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छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में प्रशासनिक व्यवस्था की खामियां अब शिक्षा व्यवस्था को भी प्रभावित कर रही हैं। कई स्कूलों के शिक्षक अब डाक देने के लिए 30 किलोमीटर तक का चक्कर लगाने को मजबूर हैं। इस स्थिति ने न केवल शिक्षकों की परेशानी बढ़ा दी है, बल्कि स्कूलों में पढ़ाई भी प्रभावित होने लगी है।

शिक्षकों का कहना है कि उन्हें नियमित रूप से कार्यालयी दस्तावेज जमा करने, पत्राचार और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए दूरस्थ ब्लॉक या जिला मुख्यालय जाना पड़ता है। इस वजह से उनका पूरा दिन इसी काम में निकल जाता है और छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होती है।

30 किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा

ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित कई स्कूलों के शिक्षकों को डाक जमा करने के लिए 25 से 30 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ रही है। कुछ मामलों में यह दूरी और भी ज्यादा बताई जा रही है।

शिक्षकों के अनुसार, स्कूलों में इंटरनेट सुविधा या डिजिटल माध्यम उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें दस्तावेज हाथ से जमा करने पड़ते हैं। इसके चलते उन्हें नियमित रूप से लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।

एक शिक्षक ने बताया कि डाक देने के लिए सुबह स्कूल से निकलना पड़ता है और वापस लौटते-लौटते शाम हो जाती है। इससे पूरे दिन की पढ़ाई प्रभावित होती है।

पढ़ाई पर पड़ रहा असर 📚

शिक्षकों के लंबे समय तक स्कूल से बाहर रहने के कारण छात्रों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा है। कई स्कूलों में वैकल्पिक शिक्षक की व्यवस्था भी नहीं होती, जिससे कक्षाएं खाली रह जाती हैं।

अभिभावकों ने भी इस समस्या को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि शिक्षकों को प्रशासनिक कार्यों में उलझाने के बजाय उन्हें पढ़ाई पर ध्यान देने का मौका मिलना चाहिए।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है।

परिवहन सुविधा भी बड़ी समस्या 🚍

ग्रामीण इलाकों में परिवहन सुविधा सीमित होने के कारण शिक्षकों की परेशानी और बढ़ जाती है। कई क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन की कमी है, जिससे शिक्षकों को निजी साधनों का उपयोग करना पड़ता है।

कुछ शिक्षकों ने बताया कि उन्हें अपने खर्च पर यात्रा करनी पड़ती है। इससे आर्थिक बोझ भी बढ़ता है।

शिक्षकों ने प्रशासन से परिवहन सुविधा या डिजिटल व्यवस्था लागू करने की मांग की है।

डिजिटल व्यवस्था की मांग

शिक्षकों ने सुझाव दिया है कि डाक और दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जाए। इससे समय की बचत होगी और पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी।

शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल व्यवस्था लागू करने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि अभी तक इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल प्रणाली लागू होने से प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

ग्रामीण स्कूलों की पुरानी समस्या

ग्रामीण स्कूलों में संसाधनों की कमी लंबे समय से बनी हुई है। इंटरनेट, कंप्यूटर और अन्य सुविधाओं की कमी के कारण शिक्षकों को पारंपरिक तरीकों पर निर्भर रहना पड़ता है।

इस समस्या के कारण शिक्षकों का समय प्रशासनिक कार्यों में अधिक खर्च होता है और पढ़ाई प्रभावित होती है।

शिक्षकों ने उठाई आवाज

शिक्षकों ने इस समस्या को लेकर उच्च अधिकारियों को पत्र भी भेजा है। उनका कहना है कि उन्हें डाक देने के लिए इतनी लंबी दूरी तय करना उचित नहीं है।

उन्होंने मांग की है कि ब्लॉक स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाए या डिजिटल प्रणाली लागू की जाए।

प्रशासन ने मांगी रिपोर्ट

मामले के सामने आने के बाद अधिकारियों ने संबंधित क्षेत्रों से रिपोर्ट मांगी है। अधिकारियों का कहना है कि समस्या का समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।

प्रशासन का कहना है कि शिक्षकों को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाएगा और जल्द ही व्यवस्था में सुधार किया जाएगा।

छात्रों के भविष्य पर असर

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति जारी रही तो छात्रों की पढ़ाई पर गंभीर असर पड़ सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से ही शिक्षा की चुनौतियां मौजूद हैं और इस तरह की समस्याएं स्थिति को और कठिन बना सकती हैं।

समाधान की जरूरत

शिक्षकों और अभिभावकों का कहना है कि इस समस्या का जल्द समाधान जरूरी है। डिजिटल व्यवस्था, स्थानीय स्तर पर डाक जमा करने की सुविधा और बेहतर समन्वय से इस समस्या को दूर किया जा सकता है।

यह विडंबना ही है कि जिन शिक्षकों को छात्रों का भविष्य संवारना है, वे प्रशासनिक व्यवस्था की खामियों के कारण 30 किलोमीटर तक चक्कर लगाने को मजबूर हैं। अब सभी की नजर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है।

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Simran

Simran is a passionate journalist who reports on politics, public policy, and social issues. Her work focuses on delivering reliable news, in-depth insights, and timely updates to readers.

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