नई दिल्ली/रायपुर, 25 अगस्त। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मंगलवार को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से नई दिल्ली में मुलाकात कर छत्तीसगढ़ की सड़क और यातायात व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे। करीब एक घंटे चली बैठक में राजधानी रायपुर सहित प्रदेश की कनेक्टिविटी और औद्योगिक परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने पर चर्चा हुई।
तेलीबांधा-जोरा एलिवेटेड रोड का होगा विस्तार
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने तेलीबांधा-जोरा प्रस्तावित एलिवेटेड रोड को वीआईपी चौक से एयरपोर्ट रोड की दिशा में करीब 300 से 500 मीटर तक बढ़ाने का आग्रह किया। इसका उद्देश्य वीआईपी चौक पर बनने वाले टी-जंक्शन पर यातायात के दबाव को कम करना है।
बताया गया कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस अतिरिक्त विस्तार के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। इससे स्वामी विवेकानंद विमानतल की ओर आने-जाने वाले यात्रियों को सुविधा मिलने और राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात दबाव कम होने की उम्मीद है।
NH-130B अब सारंगढ़ तक
सांसद ने रायपुर-बलौदाबाजार NH-130B की प्रस्तावित फोरलेन परियोजना को सारंगढ़ तक विस्तारित करने की मांग भी रखी। वर्तमान में रायपुर से बलौदाबाजार तक फोरलेन के लिए DPR तैयार की जा रही है।
बृजमोहन अग्रवाल ने बलौदाबाजार से सारंगढ़ तक के हिस्से को भी परियोजना में शामिल कर DPR तैयार कराने और फोरलेन निर्माण की स्वीकृति देने का आग्रह किया। केंद्रीय मंत्री ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए सारंगढ़ तक फोरलेन विस्तार को मंजूरी देने की बात कही।
औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी
बलौदाबाजार-भाटापारा क्षेत्र में सीमेंट संयंत्रों और अन्य बड़े उद्योगों को देखते हुए सांसद ने NH-130 और NH-130B को जोड़ने वाली नई सड़क की मांग भी रखी। प्रस्तावित मार्ग से भारी वाहनों और माल परिवहन को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। केंद्रीय मंत्री ने प्रस्ताव का परीक्षण कर आगे कार्रवाई का आश्वासन दिया।
बैठक में रायपुर-दुर्ग-भिलाई मार्ग पर ग्रेड सेपरेटर, फ्लाईओवर और सर्विस रोड, रायपुर-सिमगा-बिलासपुर कनेक्टिविटी, औद्योगिक क्षेत्रों के लिए डेडिकेटेड एक्सेस रोड और इंटरचेंज जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
सांसद ने नागपुर-गोंदिया प्रस्तावित समृद्धि एक्सप्रेसवे को गोंदिया से डोंगरगढ़, खैरागढ़, कवर्धा, मुंगेली होते हुए बिलासपुर और रायपुर तक 6-लेन कनेक्टिविटी देने का प्रस्ताव भी रखा।
इन परियोजनाओं के पूरा होने से रायपुर में भारी वाहनों का दबाव कम होने, लॉजिस्टिक लागत घटने और औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।









