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कोविड वैक्सीन नुकसान पर सुप्रीम कोर्ट निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा कोविड वैक्सीन से नुकसान के मामलों में मुआवजा नीति बनाए। साइड इफेक्ट्स जांच के लिए नए एक्सपर्ट पैनल की जरूरत नहीं।

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Author: Heshma Published: 10 Mar 2026, 3:59 PM Updated: 10 Mar 2026, 3:59 PM Views: 111
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नई दिल्ली । कोविड-19 वैक्सीन से संभावित नुकसान के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को अहम निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा है कि सरकार को ऐसे मामलों के लिए स्पष्ट और त्रुटि-रहित (एरर-फ्री) मुआवजा नीति तैयार करनी चाहिए, ताकि यदि किसी व्यक्ति को वैक्सीन के कारण गंभीर नुकसान होता है तो उसे उचित मुआवजा मिल सके।

नई दिल्ली में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल साइड इफेक्ट्स की जांच के लिए अलग से किसी नए विशेषज्ञ पैनल की जरूरत नहीं है। अदालत का कहना है कि मौजूदा तंत्र और संस्थाएं इस तरह के मामलों की जांच करने में सक्षम हैं।

सरकार से मुआवजा नीति स्पष्ट करने को कहा

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि कोविड महामारी के दौरान बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया गया था और यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी कदम था। हालांकि कुछ मामलों में वैक्सीन के संभावित दुष्प्रभावों को लेकर शिकायतें भी सामने आई हैं।

ऐसे मामलों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने सरकार से कहा कि एक स्पष्ट और व्यवस्थित मुआवजा नीति तैयार की जानी चाहिए। इससे प्रभावित लोगों को न्याय मिलने में आसानी होगी और प्रक्रिया पारदर्शी भी बनेगी।

एरर-फ्री पॉलिसी बनाने की जरूरत

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को वैक्सीन के कारण गंभीर स्वास्थ्य समस्या होती है, तो उसके लिए मुआवजा प्रक्रिया स्पष्ट और त्रुटि-रहित होनी चाहिए। अदालत ने सरकार से इस संबंध में उचित नीति बनाने और उसे प्रभावी तरीके से लागू करने की अपेक्षा जताई है।

अदालत का मानना है कि ऐसी नीति से लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रमों में पारदर्शिता बढ़ेगी।

नए एक्सपर्ट पैनल की जरूरत नहीं

सुनवाई के दौरान यह भी मुद्दा उठा कि क्या वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स की जांच के लिए एक नया विशेषज्ञ पैनल बनाया जाना चाहिए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फिलहाल इसकी आवश्यकता नहीं है।

अदालत के अनुसार देश में पहले से ही स्वास्थ्य और वैज्ञानिक संस्थानों की ऐसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं जो इस प्रकार के मामलों की जांच कर सकती हैं। इसलिए अलग से नया पैनल बनाने की जरूरत नहीं है।

टीकाकरण अभियान को बताया महत्वपूर्ण

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि कोविड महामारी के दौरान चलाया गया टीकाकरण अभियान देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण था। इस अभियान के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को संक्रमण से बचाने में मदद मिली।

अदालत ने माना कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के हित में सरकार द्वारा उठाए गए कदम आवश्यक थे। हालांकि इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि यदि किसी को नुकसान होता है तो उसके लिए उचित व्यवस्था उपलब्ध हो।

स्वास्थ्य नीति में पारदर्शिता पर जोर

अदालत की टिप्पणी को स्वास्थ्य नीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मुआवजा नीति स्पष्ट होगी तो इससे नागरिकों का विश्वास बढ़ेगा और भविष्य में भी स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संचालन में पारदर्शिता बनी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि सरकार को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जो लोगों के अधिकारों और सार्वजनिक हित दोनों के बीच संतुलन बनाए रखें।

मामले पर आगे भी जारी रहेगी सुनवाई

इस मामले को लेकर अदालत में आगे भी सुनवाई जारी रहने की संभावना है। अदालत ने सरकार से उम्मीद जताई है कि वह जल्द ही इस दिशा में आवश्यक कदम उठाएगी और मुआवजा नीति को स्पष्ट रूप से सामने लाएगी।

कोविड वैक्सीन से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी सार्वजनिक स्वास्थ्य, कानूनी व्यवस्था और नागरिक अधिकारों के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर सरकार की नीति और कदमों पर सभी की नजर बनी रहेगी।

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Heshma

Heshma is a journalist known for covering political developments, social issues, and breaking news. She is committed to delivering factual, clear, and engaging journalism for modern audiences.

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