Tue, 30 Jun 2026 · भारत संस्करण
Breaking
पुणे मर्डर: सिया के भाई साहिल को एडवोकेट आशुतोष ने भेजा 10 करोड़ का कानूनी नोटिस जनरल धीरज सेठ भारत के नए आर्मी चीफ बने, 'सुदर्शन चक्र' की संभाल चुके हैं कमान, आर्मर्ड कोर से रहा है रिश्ता मुहर्रम जुलूस में ज़हरीले कैप्सूल बांटने की साज़िश को दो महिलाओं ने कैसे रोका? जिस राम मंदिर के लिए दंगा किया, आज वहां…'; चंदा चोरी मामले पर भड़कीं महुआ मोइत्रा टेलीग्राफ़ के पूर्व संपादक बोले, 'ये बेहद अपमानजनक', वोटर लिस्ट से नाम हटने पर पासपोर्ट वेरिफ़िकेशन भी लटका अयोध्या में नजरबंद अजय राय की पत्नी ने भाजपा सरकार पर लगाया आरोप: 'मेरे पति को कुछ हुआ तो आप होंगे जिम्मेदार'
Tue, 30 Jun 2026
Advertisement
Chhattisgarh

छत्तीसगढ़: नकटी गांव विस्थापन पर विकास उपाध्याय ने सरकार को घेरा, तत्काल पुनर्वास की मांग

छत्तीसगढ़ में नकटी गांव के प्रस्तावित विस्थापन को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक व...

इस खबर की वेब स्टोरी देखें

Fallback voice mode (browser TTS).

Author: Jagraj Published: 30 Jun 2026, 2:52 PM Updated: 30 Jun 2026, 10:21 PM Views: 3
X

छत्तीसगढ़ में नकटी गांव के प्रस्तावित विस्थापन को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है। उपाध्याय ने सरकार पर विस्थापित होने वाले ग्रामीणों के प्रति असंवेदनशीलता का आरोप लगाते हुए उनके तत्काल और उचित पुनर्वास की मांग की है। यह मामला राज्य में विकास परियोजनाओं और स्थानीय आबादी के अधिकारों के बीच संतुलन साधने की चुनौती को एक बार फिर उजागर करता है।

Photo: Ahmed akacha / Pexels

विकास उपाध्याय ने अपने बयान में कहा कि नकटी गांव के लोगों को बिना किसी ठोस योजना और समयबद्ध पुनर्वास पैकेज के विस्थापित करना सरासर अन्याय है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार को पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक भूमि, आवास और आजीविका के साधन उपलब्ध कराए जाएं, उसके बाद ही विस्थापन की प्रक्रिया शुरू की जाए। उपाध्याय ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस दिशा में तत्काल कदम नहीं उठाए तो कांग्रेस पार्टी ग्रामीणों के साथ खड़ी होकर बड़ा आंदोलन करेगी।

विस्थापन का कारण और ग्रामीणों की चिंताएं

नकटी गांव के विस्थापन का मुख्य कारण एक बड़ी विकास परियोजना है, जिसके लिए भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है। हालांकि, परियोजना का विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन ऐसी खबरें हैं कि यह कोई औद्योगिक इकाई या बुनियादी ढांचा परियोजना हो सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें विस्थापन के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई है और न ही उनके साथ कोई सार्थक परामर्श किया गया है। वे अपनी पुश्तैनी जमीन, घरों और पारंपरिक आजीविका के साधनों को खोने को लेकर चिंतित हैं।

Photo: Ahmed akacha / Pexels

ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता उनके भविष्य को लेकर है। उन्हें डर है कि विस्थापन के बाद उन्हें मिलने वाला मुआवजा और पुनर्वास पैकेज उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। कई ग्रामीण खेती और वनोपज पर निर्भर हैं, और उन्हें आशंका है कि नई जगह पर उन्हें ऐसी आजीविका के अवसर नहीं मिलेंगे। इसके अलावा, सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव भी एक महत्वपूर्ण पहलू है, जिसे विस्थापन से खतरा है।

सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की राह

अभी तक राज्य सरकार की ओर से विकास उपाध्याय के आरोपों और नकटी गांव के विस्थापन पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, आमतौर पर सरकारें ऐसी परियोजनाओं को 'जनहित' में बताती हैं और दावा करती हैं कि विस्थापितों को उचित मुआवजा और पुनर्वास प्रदान किया जाएगा। लेकिन, जमीनी हकीकत अक्सर अलग होती है, जहां विस्थापितों को लंबे समय तक न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ता है।

Photo: Ahmed akacha / Pexels

इस मामले में, सरकार को चाहिए कि वह पारदर्शिता दिखाए और ग्रामीणों के साथ एक खुला संवाद स्थापित करे। एक विस्तृत पुनर्वास योजना तैयार की जाए जिसमें न केवल वित्तीय मुआवजा शामिल हो, बल्कि वैकल्पिक भूमि, रोजगार के अवसर, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच भी सुनिश्चित की जाए। विकास उपाध्याय द्वारा उठाए गए मुद्दे को गंभीरता से लेना और समयबद्ध तरीके से इसका समाधान करना सरकार के लिए महत्वपूर्ण होगा ताकि ग्रामीणों के अधिकारों की रक्षा हो सके और विकास परियोजनाओं के प्रति जनविश्वास बना रहे।

कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देना शुरू कर दिया है, जो आगामी चुनावों में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है। विकास उपाध्याय जैसे नेताओं का सक्रिय होना यह दर्शाता है कि विपक्ष इस अवसर को भुनाने की पूरी कोशिश करेगा। सरकार के लिए यह एक चुनौती है कि वह विकास और मानवीय सरोकारों के बीच संतुलन कैसे स्थापित करती है।

स्थानीय प्रशासन को भी चाहिए कि वह ग्रामीणों की शिकायतों को सुने और उन्हें दूर करने का प्रयास करे। केवल कागजी कार्रवाई पूरी करने से बात नहीं बनेगी, बल्कि वास्तविक धरातल पर ग्रामीणों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में काम करना होगा। यह एक संवेदनशील मुद्दा है जिसके लिए मानवीय दृष्टिकोण और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता है।

नकटी गांव का विस्थापन केवल एक गांव का मामला नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ में भूमि अधिग्रहण और विकास परियोजनाओं से प्रभावित होने वाले अन्य समुदायों के लिए भी एक मिसाल कायम करेगा। इसलिए, सरकार को इस मामले में एक आदर्श मॉडल स्थापित करना चाहिए जो यह दर्शाए कि विकास के साथ-साथ मानवीय गरिमा और अधिकारों का भी सम्मान किया जाता है।

विकास उपाध्याय ने मांग की है कि सरकार एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन करे जो नकटी गांव के ग्रामीणों की समस्याओं का अध्ययन करे और एक व्यवहार्य पुनर्वास योजना का प्रस्ताव दे। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जब तक ग्रामीणों को पूरी तरह से संतुष्ट नहीं किया जाता, तब तक विस्थापन की प्रक्रिया को रोक दिया जाना चाहिए।

यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य सरकार इस राजनीतिक दबाव और मानवीय मांग पर कैसे प्रतिक्रिया देती है। क्या वह विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए ग्रामीणों की चिंताओं को नजरअंदाज करेगी, या एक समावेशी दृष्टिकोण अपनाएगी जो सभी हितधारकों के हितों की रक्षा करे? यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

ग्रामीणों ने भी अपनी आवाज बुलंद करनी शुरू कर दी है और वे संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। स्थानीय मीडिया में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया जा रहा है, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ रहा है।

अंततः, यह मुद्दा सरकार की संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही की परीक्षा है। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में, जहां आदिवासी और ग्रामीण आबादी का एक बड़ा हिस्सा है, भूमि और आजीविका से जुड़े मुद्दे हमेशा महत्वपूर्ण रहे हैं।

J

Jagraj

Staff Reporter at VG Khabar.

Published: 312 | Total Views: 20868

View Profile