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10 हजार में नया-कनेक्शन,पुराने को वैध कराने लगेंगे 20 हजार: कांग्रेस बोली-पहले 600 रुपए में होता था नल कनेक्शन

जल कनेक्शन की लागत में भारी वृद्धि को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।

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Author: Jagraj Published: 28 Jun 2026, 2:51 PM Updated: 5 Jul 2026, 2:52 PM Views: 21
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जल कनेक्शन की लागत में भारी वृद्धि को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि जहां एक नया जल कनेक्शन अब 10,000 रुपये में मिलेगा, वहीं पुराने, अनाधिकृत कनेक्शनों को वैध कराने के लिए 20,000 रुपये चुकाने होंगे। कांग्रेस ने इस कदम को आम जनता पर एक बड़ा वित्तीय बोझ करार दिया है, खासकर ऐसे समय में जब महंगाई पहले से ही चरम पर है।

Photo: aboodi vesakaran / Pexels

कांग्रेस के प्रवक्ता ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि यह सरकार जनता की जेब काटने में लगी हुई है। उन्होंने याद दिलाया कि पिछली सरकारों के दौरान, विशेषकर कांग्रेस शासनकाल में, एक नया नल कनेक्शन मात्र 600 रुपये में उपलब्ध होता था। यह तुलना दर्शाती है कि जल जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए नागरिकों को अब कितना अधिक भुगतान करना पड़ेगा।

जल जीवन मिशन पर सवाल

पार्टी ने सरकार की 'जल जीवन मिशन' योजना पर भी सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि एक ओर सरकार हर घर नल से जल पहुंचाने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर कनेक्शन की लागत को इतना बढ़ा दिया गया है कि यह आम आदमी की पहुंच से बाहर होता जा रहा है। यह विरोधाभास सरकार की नीतियों पर संदेह पैदा करता है।

Photo: Erik Mclean / Pexels

कांग्रेस नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि पानी एक मौलिक अधिकार है और इसे व्यावसायिक लाभ का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इतनी ऊंची दरों से गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर सीधा असर पड़ेगा, जो पहले से ही आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। कई परिवार ऐसे होंगे जो इन बढ़ी हुई लागतों को वहन करने में असमर्थ होंगे।

विपक्ष ने मांग की है कि सरकार तत्काल इस फैसले को वापस ले और जल कनेक्शन की दरों को तर्कसंगत बनाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जनता की मांग पर ध्यान नहीं दिया, तो कांग्रेस पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन शुरू करेगी। यह मुद्दा आगामी चुनावों में एक महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दा बन सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जल कनेक्शन की लागत में यह वृद्धि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में एक बड़ा मुद्दा बन सकती है। शहरी क्षेत्रों में जहां अवैध कनेक्शनों को वैध कराने की समस्या है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में नए कनेक्शन की मांग अधिक है। दोनों ही मामलों में बढ़ी हुई कीमतें लोगों को प्रभावित करेंगी।

सरकार की ओर से अभी तक इस आरोप पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, सत्तारूढ़ दल के कुछ नेताओं ने अनौपचारिक रूप से कहा है कि नई दरें जल आपूर्ति के बुनियादी ढांचे के रखरखाव और विस्तार की लागत को कवर करने के लिए आवश्यक हैं। उनका तर्क है कि गुणवत्तापूर्ण सेवा प्रदान करने के लिए यह वृद्धि अपरिहार्य है।

लेकिन कांग्रेस इस तर्क को मानने को तैयार नहीं है। पार्टी का कहना है कि सरकार को जल परियोजनाओं के लिए अन्य वित्तीय स्रोतों का पता लगाना चाहिए, न कि सीधे जनता पर बोझ डालना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया है कि सरकार को केंद्र से अधिक फंड की मांग करनी चाहिए या अन्य राजस्व सृजन के तरीकों पर विचार करना चाहिए।

यह मुद्दा केवल वित्तीय बोझ का नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय का भी है। कांग्रेस का तर्क है कि पानी तक पहुंच सभी के लिए समान होनी चाहिए, चाहे उनकी आर्थिक स्थिति कुछ भी हो। बढ़ी हुई कीमतें इस समानता के सिद्धांत का उल्लंघन करती हैं और समाज के कमजोर वर्गों को और हाशिए पर धकेल सकती हैं।

आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक गहमागहमी बढ़ने की संभावना है। कांग्रेस ने इसे एक जन-विरोधी कदम के रूप में प्रचारित करने की पूरी तैयारी कर ली है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस चुनौती का सामना कैसे करती है और क्या वह अपने फैसले पर पुनर्विचार करती है या उस पर अडिग रहती है।

नागरिक समाज संगठन और उपभोक्ता अधिकार समूह भी इस मुद्दे पर सक्रिय हो गए हैं। कई समूहों ने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है और कहा है कि पानी की लागत को इतना महंगा करना उचित नहीं है, खासकर जब यह एक आवश्यक संसाधन है।

यह विवाद राज्य में जल आपूर्ति और बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण के व्यापक मुद्दों को भी उजागर करता है। सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि ये दरें क्यों बढ़ाई गई हैं और इनसे प्राप्त धन का उपयोग कैसे किया जाएगा, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और जनता का विश्वास बना रहे।

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Staff Reporter at VG Khabar.

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