रायपुर: न्याय व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने की जिम्मेदारी
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षु न्यायाधीशों से अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका समाज में न्याय और संविधान के मूल्यों की रक्षा करने वाली सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में से एक है। इसलिए न्यायिक सेवा में आने वाले अधिकारियों को अपने दायित्वों का पालन पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ करना चाहिए।
यह बातें मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने तब कहीं जब छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी, बिलासपुर के प्रशिक्षु न्यायाधीशों ने रायपुर में विधानसभा स्थित उनके कार्यालय में सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सभी प्रशिक्षु न्यायाधीशों को न्यायिक सेवा में चयन के लिए बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
न्यायपालिका लोकतंत्र की मजबूत आधारशिला
मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायपालिका लोकतंत्र की मजबूत आधारशिला है और इसका सबसे बड़ा उद्देश्य आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने प्रशिक्षु न्यायाधीशों को संबोधित करते हुए कहा कि जनता का भरोसा न्याय व्यवस्था पर टिका होता है और यह भरोसा तभी कायम रहता है जब न्यायिक अधिकारी निष्पक्ष, पारदर्शी और संवेदनशील होकर काम करते हैं।
उन्होंने कहा कि एक न्यायाधीश के निर्णय का प्रभाव केवल किसी एक व्यक्ति या मामले तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर पूरे समाज पर पड़ता है। इसलिए न्यायिक सेवा में आने वाले अधिकारियों को संविधान के सिद्धांतों और कानून की मर्यादा का हमेशा पालन करना चाहिए।
निष्पक्षता और संवेदनशीलता पर दिया विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षु न्यायाधीशों से कहा कि वे अपने कार्यकाल के दौरान निष्पक्षता को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। न्यायिक पद पर बैठने वाला व्यक्ति समाज में न्याय का प्रतीक होता है, इसलिए उसे किसी भी प्रकार के दबाव या पक्षपात से दूर रहकर फैसले लेने चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि न्याय देते समय संवेदनशीलता भी उतनी ही जरूरी है, क्योंकि अदालतों में आने वाले अधिकांश लोग अपने जीवन की कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे होते हैं। ऐसे में न्यायाधीशों का मानवीय दृष्टिकोण न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाता है।
न्यायिक सेवा में बड़ी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायिक सेवा केवल एक नौकरी नहीं बल्कि एक बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी है। न्यायाधीशों का आचरण और उनका निर्णय दोनों ही समाज में कानून के प्रति सम्मान और विश्वास को बढ़ाते हैं।
उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों को सलाह दी कि वे अपने करियर में ईमानदारी, अनुशासन और समर्पण को हमेशा बनाए रखें। न्यायपालिका की प्रतिष्ठा बनाए रखना हर न्यायिक अधिकारी की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है।
न्यायिक अकादमी की भूमिका भी अहम
छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी, बिलासपुर प्रशिक्षु न्यायाधीशों को न्यायिक सेवा के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यहां प्रशिक्षण के दौरान उन्हें कानून, न्यायिक प्रक्रिया, नैतिक मूल्यों और संवैधानिक दायित्वों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाती है।
इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम न्यायिक अधिकारियों को व्यावहारिक अनुभव और निर्णय क्षमता विकसित करने में मदद करते हैं, जिससे वे भविष्य में न्यायिक व्यवस्था को बेहतर तरीके से संचालित कर सकें।
कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारी भी रहे मौजूद
इस मुलाकात के दौरान राज्य शासन के कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। प्रमुख सचिव विधि सुषमा सांवत और छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी की संचालक निधि शर्मा तिवारी सहित अन्य अधिकारी भी कार्यक्रम में मौजूद थे।
अधिकारियों ने प्रशिक्षु न्यायाधीशों को न्यायिक सेवा के महत्व और जिम्मेदारियों के बारे में जानकारी दी तथा उन्हें अपने कार्य में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए प्रेरित किया।