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Chhattisgarh

प्रसिद्ध पंडवानी गायिका पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन, रायपुर AIIMS में ली अंतिम सांस

प्रसिद्ध पंडवानी गायिका और भारत की सांस्कृतिक धरोहर पद्म विभूषण तीजन बाई का आज रायपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में निधन हो गया। उनके निधन से…

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Author: Jagraj Published: 6 Jul 2026, 1:44 PM Views: 0
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प्रसिद्ध पंडवानी गायिका और भारत की सांस्कृतिक धरोहर पद्म विभूषण तीजन बाई का आज रायपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में निधन हो गया। उनके निधन से कला और संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। उन्होंने पंडवानी गायन को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई और छत्तीसगढ़ की लोककला को एक नई ऊंचाई प्रदान की।

Photo: cottonbro studio / Pexels

तीजन बाई पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थीं और उन्हें इलाज के लिए रायपुर AIIMS में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर सुनते ही उनके प्रशंसकों और कला प्रेमियों में गहरा दुख छा गया है।

एक युग का अंत: तीजन बाई का जीवन और कला

तीजन बाई का जन्म छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के गनियारी गांव में हुआ था। उन्होंने बहुत कम उम्र में ही पंडवानी गायन सीखना शुरू कर दिया था। पंडवानी महाभारत की कहानियों को गायन और अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत करने की एक पारंपरिक लोककला है। तीजन बाई ने इस कला को अपने अनूठे अंदाज और दमदार आवाज से एक नया आयाम दिया।

Photo: Alena Darmel / Pexels

उनकी गायन शैली में महाभारत के पात्रों को जीवंत करने की अद्भुत क्षमता थी। वे अपनी प्रस्तुति में सिर्फ गाती ही नहीं थीं, बल्कि पात्रों के हाव-भाव और संवादों को भी बखूबी प्रस्तुत करती थीं। उनकी यह विशेषता ही उन्हें अन्य पंडवानी गायिकाओं से अलग बनाती थी।

तीजन बाई को पंडवानी की 'कापालिक' शैली के लिए जाना जाता था, जिसमें वे बिना किसी वाद्य यंत्र के, केवल अपने मुखर प्रदर्शन और एकतारा के साथ महाभारत की कहानियों को प्रस्तुत करती थीं। उनकी यह शैली अत्यंत प्रभावशाली और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देने वाली होती थी।

Photo: cottonbro studio / Pexels

उन्होंने न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी पंडवानी का प्रदर्शन किया और इस प्राचीन कला को वैश्विक पहचान दिलाई। उनकी प्रस्तुतियों ने दुनिया भर के कला समीक्षकों और दर्शकों को प्रभावित किया।

सम्मान और विरासत

तीजन बाई को उनके असाधारण योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था। उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से नवाजा गया था। ये सम्मान उनकी कला के प्रति समर्पण और उनकी अद्वितीय प्रतिभा के प्रमाण हैं।

उनके निधन से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को अपूरणीय क्षति हुई है। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी पंडवानी कला को समर्पित कर दी और इसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए अथक प्रयास किए। उनके जाने से एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है जिसे भर पाना मुश्किल होगा।

तीजन बाई ने कई युवा कलाकारों को पंडवानी सीखने और इस कला को जीवित रखने के लिए प्रेरित किया। उनके शिष्यों और अनुयायियों की एक बड़ी संख्या है जो उनकी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

उनके निधन पर देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने शोक व्यक्त किया है। उन्होंने तीजन बाई को एक महान कलाकार और भारत की सांस्कृतिक राजदूत के रूप में याद किया।

छत्तीसगढ़ सरकार ने उनके सम्मान में राजकीय शोक की घोषणा की है। उनके पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव ले जाया जाएगा, जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

तीजन बाई हमेशा अपनी ओजस्वी आवाज, दमदार प्रस्तुति और पंडवानी कला के प्रति अपने अगाध प्रेम के लिए याद की जाएंगी। उनका जीवन और कला आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

उन्होंने यह साबित किया कि लोककला भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती है और सांस्कृतिक सीमाओं को पार कर सकती है। उनका योगदान भारतीय कला के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित रहेगा।

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Staff Reporter at VG Khabar.

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