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“पिछले साल सरकार का कर्ज 20% बढ़ा”

CAG रिपोर्ट में खुलासा, छत्तीसगढ़ सरकार का कर्ज 20% बढ़ा, राजकोषीय घाटा भी बढ़ा, वित्तीय स्थिति पर उठे सवाल।”

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Author: Simran Published: 17 Mar 2026, 6:48 PM Updated: 18 May 2026, 10:30 PM Views: 80
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छत्तीसगढ़। की वित्तीय स्थिति को लेकर एक अहम खुलासा सामने आया है। हाल ही में पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य सरकार ने पिछले वित्तीय वर्ष में पहले की तुलना में काफी अधिक कर्ज लिया। यह आंकड़ा न केवल राज्य की आर्थिक स्थिति को दर्शाता है, बल्कि भविष्य की वित्तीय चुनौतियों की ओर भी संकेत करता है।

CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

विधानसभा में पेश रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान राज्य सरकार ने कुल 1,30,513 करोड़ रुपये का कर्ज लिया, जो पिछले वित्तीय वर्ष 2023-24 के मुकाबले लगभग 21 प्रतिशत अधिक है।
इससे पहले 2023-24 में सरकार ने 1,07,921 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। यह लगातार बढ़ता कर्ज राज्य के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल खड़े कर रहा है।

बजट और खर्च का अंतर

CAG रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि सरकार ने 2024-25 के लिए 1,84,703 करोड़ रुपये का बजट पारित किया था, लेकिन इसमें से करीब 28,759 करोड़ रुपये खर्च ही नहीं हो पाए
यानी कुल वास्तविक खर्च 1,56,636 करोड़ रुपये रहा। खर्च में कमी के पीछे राजस्व वसूली में कमी और पुनर्प्राप्ति में गिरावट को प्रमुख कारण बताया गया है।

राजस्व प्राप्तियों का विश्लेषण

रिपोर्ट के मुताबिक राज्य को कुल 1,45,765 करोड़ रुपये की प्राप्तियां हुईं। इसमें:

  • कर राजस्व: 88,609 करोड़ रुपये

  • गैर-कर राजस्व: 17,420 करोड़ रुपये

  • केंद्रीय सहायता अनुदान: 14,260 करोड़ रुपये

इसके अलावा केंद्र से करों और शुल्क के हिस्से के रूप में 43,844 करोड़ रुपये की राशि मिली, जिससे राज्य के कुल राजस्व में कुछ बढ़ोतरी दर्ज की गई।

राजकोषीय और राजस्व घाटा

CAG रिपोर्ट के अनुसार:

  • राजस्व घाटा: 5,099 करोड़ रुपये (GSDP का 0.90%)

  • राजकोषीय घाटा: 25,447 करोड़ रुपये (GSDP का 4.48%)

राजकोषीय घाटा पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुना हो गया है, जो वित्तीय संतुलन के लिए चिंता का विषय है।

निवेश पर कम रिटर्न

राज्य सरकार ने विभिन्न निगमों, कंपनियों और सहकारी संस्थाओं में कुल 7,717 करोड़ रुपये का निवेश किया। लेकिन इसके बदले सरकार को मात्र 1.49 करोड़ रुपये का लाभांश प्राप्त हुआ।
यह बेहद कम रिटर्न दर्शाता है कि निवेश की रणनीति पर पुनर्विचार की जरूरत है।

कर्ज बढ़ने के कारण

विशेषज्ञों के अनुसार कर्ज में बढ़ोतरी के पीछे कई कारण हो सकते हैं:

  • विकास परियोजनाओं पर बढ़ता खर्च

  • राजस्व वसूली में कमी

  • सामाजिक योजनाओं पर अधिक व्यय

  • आर्थिक गतिविधियों में अपेक्षित वृद्धि का अभाव

इन कारकों के कारण सरकार को वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए अधिक कर्ज लेना पड़ा।

आर्थिक प्रभाव और चुनौतियां

बढ़ता कर्ज राज्य की अर्थव्यवस्था पर कई तरह से असर डाल सकता है:

  • भविष्य में ब्याज भुगतान का दबाव बढ़ेगा

  • विकास कार्यों के लिए संसाधनों की कमी हो सकती है

  • वित्तीय अनुशासन बनाए रखना कठिन होगा

हालांकि, यदि कर्ज का उपयोग उत्पादक क्षेत्रों में किया जाए तो यह विकास को भी गति दे सकता है।

सरकार के सामने आगे की राह

वित्तीय स्थिति को संतुलित रखने के लिए सरकार को:

  • राजस्व संग्रह बढ़ाने पर ध्यान देना होगा

  • अनावश्यक खर्चों में कटौती करनी होगी

  • निवेश पर बेहतर रिटर्न सुनिश्चित करना होगा

  • दीर्घकालिक वित्तीय योजना तैयार करनी होगी

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Simran

Simran is a passionate journalist who reports on politics, public policy, and social issues. Her work focuses on delivering reliable news, in-depth insights, and timely updates to readers.

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