रायपुर में भूजल स्तर को बचाने के लिए बोर खनन पर रोक लगाए जाने के बावजूद शहर में धड़ल्ले से खुदाई जारी है। प्रशासन द्वारा जारी प्रतिबंध आदेश के बाद भी कई इलाकों में रात के समय और बिना अनुमति के बोरवेल खुदाई की जा रही है। इससे प्रशासनिक कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
गर्मियों के मौसम में बढ़ते जल संकट को देखते हुए प्रशासन ने बोर खनन पर अस्थायी रोक लगाई थी। इस फैसले का उद्देश्य भूजल स्तर को गिरने से रोकना और जल संसाधनों का संतुलन बनाए रखना था। लेकिन जमीन पर स्थिति इससे अलग नजर आ रही है, जहां नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है।
कई इलाकों में जारी है अवैध खुदाई
शहर के कई इलाकों में बोर खनन का काम बिना अनुमति के जारी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि देर रात या सुबह जल्दी मशीनें लगाकर खुदाई की जा रही है। कई स्थानों पर बिना किसी सूचना या अनुमति के बोरवेल बनाए जा रहे हैं।
नागरिकों का कहना है कि प्रतिबंध के बावजूद इस तरह की गतिविधियां प्रशासन की निगरानी पर सवाल खड़े करती हैं। लोगों ने मांग की है कि अवैध बोर खनन पर सख्त कार्रवाई की जाए और दोषियों के खिलाफ जुर्माना लगाया जाए।
भूजल स्तर लगातार गिरने की चिंता
विशेषज्ञों के अनुसार, रायपुर में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। हर साल गर्मियों में पानी की समस्या बढ़ती जा रही है। बोरवेल की बढ़ती संख्या और अनियंत्रित खनन इसके प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।
जल संसाधन विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बोर खनन पर सख्ती नहीं की गई तो आने वाले समय में जल संकट और गहरा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया है कि भूजल संरक्षण के लिए सख्त नियम लागू किए जाएं और नियमित निगरानी की जाए।
प्रशासन ने जारी किया था प्रतिबंध आदेश
रायपुर प्रशासन ने हाल ही में बोर खनन पर रोक लगाने का आदेश जारी किया था। इस आदेश के तहत बिना अनुमति के नए बोरवेल खोदने पर प्रतिबंध लगाया गया था। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि प्रतिबंध के बावजूद कई क्षेत्रों में बोर खनन जारी रहने से प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ स्थानों पर शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है।
पानी की बढ़ती मांग बनी वजह
शहर में तेजी से बढ़ती आबादी और गर्मी के कारण पानी की मांग बढ़ गई है। कई कॉलोनियों में पानी की आपूर्ति सीमित होने के कारण लोग निजी बोरवेल का सहारा ले रहे हैं। यही वजह है कि प्रतिबंध के बावजूद बोर खनन जारी है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि निजी बोरवेल समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। इसके बजाय वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण के उपायों पर जोर देना चाहिए।
कार्रवाई की मांग तेज
स्थानीय नागरिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि अवैध बोर खनन रोकने के लिए निगरानी टीम बनाई जाए और मशीनों को जब्त किया जाए।
कुछ नागरिकों ने यह भी सुझाव दिया है कि शिकायत दर्ज कराने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाए ताकि अवैध खुदाई की सूचना तुरंत प्रशासन तक पहुंच सके।
प्रशासन ने सख्ती के दिए संकेत
प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा है कि बोर खनन पर लगी रोक का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, निगरानी टीमों को सक्रिय किया गया है और शिकायत मिलने पर तुरंत जांच की जाएगी।
अधिकारियों ने नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है और अवैध खुदाई की सूचना देने को कहा है। उनका कहना है कि भूजल संरक्षण सभी की जिम्मेदारी है और नियमों का पालन जरूरी है।
जल संकट से निपटने की जरूरत
रायपुर में बढ़ते जल संकट को देखते हुए विशेषज्ञों ने दीर्घकालिक समाधान अपनाने की जरूरत बताई है। वर्षा जल संचयन, जल संरक्षण और जल प्रबंधन की बेहतर व्यवस्था से ही समस्या का समाधान संभव है।
बोर खनन पर रोक के बावजूद जारी अवैध खुदाई ने शहर में जल संकट को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी सख्ती दिखाता है और अवैध बोर खनन पर किस तरह लगाम लगाता है।