रायपुर स्थित पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के गौरवशाली अवसर पर प्रदेश स्तरीय खादी सम्मेलन एवं ग्रामोद्योग विकास प्रदर्शनी का भव्य आयोजन किया गया। इस गरिमामयी कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ के ग्रामोद्योग एवं स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने की। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथियों के रूप में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक मोतीलाल साहू और रायपुर की महापौर मीनल चौबे सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बुनकर समुदाय के लोग और खादी प्रेमी भी शामिल हुए, जिन्होंने गांधीजी के स्वदेशी के संदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। यह आयोजन न केवल खादी के प्रचार-प्रसार का माध्यम बना, बल्कि इसने स्थानीय कारीगरों के हुनर को एक सशक्त मंच प्रदान कर राज्य की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान को मजबूती प्रदान की।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुशल मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा इस विशेष अवसर पर खादी वस्त्रों को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की गई। प्रदेश में खादी की पहुंच बढ़ाने और बुनकरों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के उद्देश्य से 02 अक्टूबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक खादी वस्त्रों की खरीद पर 25 प्रतिशत की विशेष छूट देने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही, आधुनिक पीढ़ी और युवाओं को खादी से भावनात्मक रूप से जोड़ने के लिए ‘सेल्फी विद खादी’ अभियान की विधिवत शुरुआत की गई। इस अभियान के तहत लोग खादी के वस्त्र पहनकर अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करेंगे, जिससे खादी को एक नए फैशन सिंबल के रूप में पहचान मिलेगी और स्थानीय उत्पादों के प्रति लोगों का रुझान बढ़ेगा।

राज्य के ग्रामोद्योग क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई नवीन परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया। रायपुर जिले के कूंवरगढ़ में खादी उत्पादन केंद्र के नवनिर्मित भवन और अंबिकापुर में स्थापित नए प्रीमियम सेल्स आउटलेट का वर्चुअल माध्यम से लोकार्पण किया गया। विशेष रूप से बस्तर संभाग के नक्सल मुक्त क्षेत्रों में हाथकरघा प्रभाग द्वारा नए बुनाई प्रशिक्षण केंद्र शुरू किए गए हैं, जो वहां के युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोलेंगे। रेशम प्रभाग ने भी अपनी नई ब्रांड ‘अमारी सिल्क’ को बाजार में उतारा है, जो छत्तीसगढ़ की रेशम कला को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाएगा। इसके अतिरिक्त, संभाग के सातों जिलों के युवाओं के लिए विशेष स्वरोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आगाज किया गया, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
डिजिटल क्रांति के दौर में खादी और हैंडलूम उत्पादों की पहुंच को व्यापक बनाने के लिए हथकरघा संघ द्वारा एक नया ऑनलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया गया। इस अवसर पर ग्रामोद्योग मंत्री गजेन्द्र यादव ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ के विजन को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जब हम स्वदेशी वस्तुओं की खरीद करते हैं, तो उसका सीधा लाभ हमारे स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और छोटे व्यापारियों को मिलता है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के विश्वप्रसिद्ध 'कोसा' वस्त्रों और स्थानीय शिल्पकारों की कला की जमकर सराहना की। मंत्री यादव ने जोर देकर कहा कि ग्रामोद्योग को एकीकृत कर ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ बनाना ही सरकार की प्राथमिकता है, जिससे आत्मनिर्भर भारत का सपना धरातल पर साकार हो सके।

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने गांधीवादी विचारों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महात्मा गांधी ने खादी और चरखे को स्वावलंबन और आर्थिक सशक्तिकरण का प्रतीक बनाया था। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि समाज में कोई भी बड़ा परिवर्तन छोटे और सार्थक प्रयासों से ही संभव होता है। इसलिए, हर नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह खादी और स्थानीय उत्पादों को अपने जीवन का हिस्सा बनाए। राजवाड़े ने विश्वास जताया कि खादी को बढ़ावा देने से न केवल महिलाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि यह ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव लाएगा। उन्होंने स्थानीय उत्पादों के प्रति गर्व की भावना विकसित करने पर बल दिया।
समारोह के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले बुनकरों, प्रशिक्षकों और विभागीय योजनाओं के लाभार्थियों को प्रोत्साहन राशि के चेक और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया, जिससे उनके मनोबल में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। बस्तर की महिला समूहों द्वारा 'शांति से विकास' विषय पर आधारित मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं, जिन्होंने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रदर्शनी में बचे हुए कपड़ों यानी वेस्ट क्लॉथ से निर्मित स्वदेशी खिलौनों ने भी सबका ध्यान आकर्षित किया, जो पर्यावरण संरक्षण और रचनात्मकता का अनूठा संगम थे। कार्यक्रम के अंत में ग्रामोद्योग मंत्री गजेन्द्र यादव ने स्वयं चरखा चलाकर कताई का अनुभव लिया और यह संदेश दिया कि हमारी परंपराएं ही हमारे भविष्य के विकास का आधार हैं।









