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नितिन गडकरी-शिवराज सिंह चौहान की तरह देवेंद्र फडणवीस को प्रधानमंत्री की रेस से हटाने की साजिश, उद्धव ठाकरे के गंभीर आरोप

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर गरमा गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भारत...

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Author: Jagraj Published: 29 Jun 2026, 2:20 PM Updated: 5 Jul 2026, 2:52 PM Views: 30
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महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर गरमा गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर एक कथित 'साजिश' का गंभीर आरोप लगाया है। ठाकरे ने दावा किया है कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को प्रधानमंत्री पद की दौड़ से 'हटाने' की कोशिश की जा रही है, ठीक उसी तरह जैसे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ किया गया था। यह आरोप ऐसे समय में आया है जब भाजपा के भीतर आंतरिक गतिशीलता और भविष्य के नेतृत्व को लेकर अटकलें तेज हैं।

Photo: Voters Party International / Pexels

उद्धव ठाकरे के इन बयानों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। उन्होंने मुंबई में एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की, जहां उन्होंने भाजपा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। ठाकरे ने कहा कि भाजपा अपने ही वरिष्ठ और सक्षम नेताओं को हाशिए पर धकेलने का काम कर रही है, ताकि एक विशेष व्यक्ति का मार्ग प्रशस्त किया जा सके। उन्होंने इस प्रवृत्ति को 'लोकतंत्र के लिए खतरनाक' बताया और कहा कि यह भाजपा के 'एकला चलो' नीति का हिस्सा है।

भाजपा की आंतरिक राजनीति पर सवाल

ठाकरे के आरोपों का मुख्य बिंदु भाजपा की आंतरिक राजनीति और शक्ति संतुलन पर केंद्रित है। उन्होंने नितिन गडकरी और शिवराज सिंह चौहान का उदाहरण दिया, जो दोनों ही अपनी-अपनी क्षमताओं और जनाधार के लिए जाने जाते हैं, लेकिन कथित तौर पर राष्ट्रीय राजनीति में उन्हें वह स्थान नहीं मिल पाया जो उनके कद के अनुरूप था। ठाकरे का इशारा इस ओर था कि फडणवीस के साथ भी ऐसा ही हो सकता है, जो महाराष्ट्र में भाजपा के एक मजबूत चेहरे और मुख्यमंत्री पद के पूर्व दावेदार रहे हैं।

Photo: Voters Party International / Pexels

देवेंद्र फडणवीस, महाराष्ट्र में भाजपा के सबसे प्रमुख नेताओं में से एक हैं और उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में सफलतापूर्वक कार्य किया है। उनकी राजनीतिक सूझबूझ और प्रशासनिक क्षमता को अक्सर सराहा जाता है। ऐसे में ठाकरे का यह आरोप कि उन्हें जानबूझकर प्रधानमंत्री पद की संभावित दौड़ से बाहर किया जा रहा है, भाजपा के भीतर संभावित गुटबाजी और सत्ता संघर्ष की ओर इशारा करता है। हालांकि, भाजपा ने इन आरोपों को निराधार बताया है।

शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख ने आगे कहा कि भाजपा की यह रणनीति केवल व्यक्तियों को नहीं, बल्कि क्षेत्रीय नेतृत्व को भी कमजोर करती है। उन्होंने तर्क दिया कि जब सक्षम क्षेत्रीय नेता राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें 'अदृश्य शक्तियों' द्वारा रोका जाता है। यह आरोप भाजपा की केंद्रीय नेतृत्व की मजबूत पकड़ और उसके द्वारा क्षेत्रीय नेताओं को नियंत्रित करने की कथित प्रवृत्ति पर प्रकाश डालता है।

Photo: Voters Party International / Pexels

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उद्धव ठाकरे के ये आरोप केवल देवेंद्र फडणवीस तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि यह भाजपा के भीतर 'एकल नेतृत्व' की बढ़ती प्रवृत्ति पर भी एक टिप्पणी है। उनका मानना है कि ठाकरे इन आरोपों के माध्यम से भाजपा के उन आंतरिक विरोधियों को भी संदेश देना चाहते हैं जो वर्तमान नेतृत्व से असंतुष्ट हो सकते हैं। यह महाराष्ट्र में आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल को और भी गरमा सकता है।

इन आरोपों पर भाजपा की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आने की उम्मीद है। पार्टी के नेता अक्सर ऐसे आरोपों को 'राजनीति से प्रेरित' और 'निराधार' बताकर खारिज करते रहे हैं। हालांकि, ये आरोप भाजपा के भीतर चल रही आंतरिक बहसों और भविष्य के नेतृत्व को लेकर चल रही अटकलों को एक नई दिशा दे सकते हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इन गंभीर आरोपों का जवाब कैसे देती है और क्या इससे पार्टी की आंतरिक गतिशीलता पर कोई असर पड़ता है।

ठाकरे के बयान महाराष्ट्र की राजनीति में महा विकास अघाड़ी (एमवीए) और भाजपा-शिंदे गुट के बीच जारी खींचतान का भी हिस्सा हैं। एमवीए लगातार भाजपा पर अपने सहयोगियों और विरोधियों को कमजोर करने का आरोप लगाता रहा है। यह आरोप फडणवीस जैसे प्रमुख भाजपा नेता को निशाना बनाकर भाजपा के भीतर ही दरार पैदा करने की एक रणनीति भी हो सकती है।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि भारतीय राजनीति में प्रधानमंत्री पद की दौड़ हमेशा से ही एक संवेदनशील विषय रही है। विभिन्न नेताओं की महत्वाकांक्षाएं और पार्टी के भीतर उनकी स्थिति अक्सर अटकलों का विषय बनती रही है। ठाकरे के आरोप इन अटकलों को और बल देते हैं और भाजपा के भीतर भविष्य के नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चाओं को सार्वजनिक पटल पर लाते हैं।

कुल मिलाकर, उद्धव ठाकरे के ये आरोप महाराष्ट्र और राष्ट्रीय राजनीति दोनों में महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बन गए हैं। वे भाजपा की आंतरिक कार्यप्रणाली, नेतृत्व चयन प्रक्रिया और पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन पर गंभीर सवाल उठाते हैं। आने वाले दिनों में इन आरोपों पर और भी राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिल सकती है, जिससे राजनीतिक तापमान और बढ़ने की संभावना है।

यह घटनाक्रम महाराष्ट्र में भाजपा के लिए एक आंतरिक चुनौती पेश कर सकता है, खासकर तब जब पार्टी राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। उद्धव ठाकरे ने एक बार फिर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व पर निशाना साधते हुए अपने राजनीतिक विरोध को तेज कर दिया है।

इन आरोपों के बाद, राजनीतिक विश्लेषक इस बात पर भी गौर कर रहे हैं कि क्या यह बयान देवेंद्र फडणवीस के राजनीतिक भविष्य पर कोई असर डालेगा। हालांकि, यह कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन यह निश्चित रूप से भाजपा के भीतर नेतृत्व की बहस को और तेज कर सकता है।

अंततः, ठाकरे के ये आरोप भाजपा के लिए एक अग्निपरीक्षा साबित हो सकते हैं कि वह अपने भीतर के नेताओं की महत्वाकांक्षाओं और बाहरी आलोचकों के हमलों को कैसे संभालती है। यह देखना होगा कि आने वाले समय में यह राजनीतिक नाटक क्या मोड़ लेता है।

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Staff Reporter at VG Khabar.

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