वैश्विक तनाव का बाजार पर असर, निर्माण और स्वास्थ्य क्षेत्र पर बढ़ा दबाव
वैश्विक स्तर पर बढ़ते युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारतीय बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। लकड़ी, लोहा, स्टील और अन्य निर्माण सामग्री की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। इतना ही नहीं, अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली डायग्नोस्टिक मशीनें भी 50 लाख रुपये तक महंगी हो गई हैं। बढ़ती कीमतों से निर्माण कार्य, रियल एस्टेट और स्वास्थ्य क्षेत्र पर सीधा असर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य-पूर्व और यूरोप में जारी तनाव, सप्लाई चेन में बाधा और कच्चे माल की कमी के कारण यह स्थिति बनी है। खासकर ईरान और रूस से जुड़े घटनाक्रमों ने वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ा दी है, जिसका असर भारत सहित कई देशों पर पड़ रहा है।
लकड़ी और निर्माण सामग्री की कीमतों में उछाल
बाजार के जानकारों के अनुसार पिछले कुछ हफ्तों में लकड़ी की कीमतों में 10 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। आयात पर निर्भर कई प्रकार की लकड़ी की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी हुई है।
निर्माण कंपनियों का कहना है कि कच्चे माल की लागत बढ़ने से प्रोजेक्ट की कुल लागत भी बढ़ रही है। इससे नए प्रोजेक्ट शुरू करने में देरी हो सकती है। साथ ही, पहले से चल रहे निर्माण कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
रियल एस्टेट डेवलपर्स का कहना है कि यदि कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो मकानों और व्यावसायिक परियोजनाओं की लागत में भी बढ़ोतरी होगी। इससे घर खरीदने वाले लोगों पर भी बोझ बढ़ सकता है।
लोहा और स्टील भी हुआ महंगा
लकड़ी के साथ-साथ लोहा और स्टील की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी देखी गई है। स्टील कंपनियों ने कच्चे माल की लागत बढ़ने के कारण कीमतों में संशोधन किया है।
उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, स्टील की कीमतों में 8 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। इसका असर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट, पुल, सड़क और भवन निर्माण पर पड़ रहा है।
निर्माण क्षेत्र से जुड़े ठेकेदारों का कहना है कि अचानक बढ़ी कीमतों से बजट बिगड़ गया है। कई परियोजनाओं की लागत पहले से तय थी, लेकिन अब उन्हें अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।
डायग्नोस्टिक मशीनें 50 लाख तक महंगी
स्वास्थ्य क्षेत्र भी इस महंगाई से अछूता नहीं है। अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली एमआरआई, सीटी स्कैन और अन्य डायग्नोस्टिक मशीनों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है।
अस्पताल संचालकों के अनुसार, कई मशीनों की कीमत 20 से 50 लाख रुपये तक बढ़ गई है। आयातित उपकरणों की कीमतें डॉलर की मजबूती और सप्लाई में कमी के कारण बढ़ी हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इससे नए अस्पतालों की स्थापना और उपकरणों की खरीद प्रभावित हो सकती है। साथ ही, डायग्नोस्टिक सेवाओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी की संभावना है।
सप्लाई चेन बाधित होने से बढ़ी लागत
युद्ध और वैश्विक तनाव के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। कई देशों से कच्चे माल की आपूर्ति में देरी हो रही है। शिपिंग लागत भी बढ़ गई है, जिससे आयातित सामान महंगा हो गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो कीमतों में और वृद्धि हो सकती है। इससे उद्योग और व्यापार दोनों प्रभावित होंगे।
रियल एस्टेट और उद्योग पर असर
निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतों का असर रियल एस्टेट सेक्टर पर साफ दिखाई दे रहा है। डेवलपर्स नई परियोजनाओं को लेकर सतर्क हो गए हैं।
उद्योग जगत का कहना है कि लागत बढ़ने से उत्पादन महंगा होगा और इसका असर बाजार कीमतों पर पड़ेगा। इससे महंगाई दर बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।
आम लोगों पर भी बढ़ेगा बोझ
विशेषज्ञों का कहना है कि निर्माण सामग्री और स्वास्थ्य उपकरण महंगे होने से आम लोगों पर भी असर पड़ेगा। मकानों की कीमतें बढ़ सकती हैं और चिकित्सा सेवाएं महंगी हो सकती हैं।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्थिति सामान्य होने तक कीमतों में स्थिरता की उम्मीद कम है। फिलहाल उद्योग और उपभोक्ता दोनों बढ़ती लागत से जूझ रहे हैं।
आगे क्या?
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक तनाव कम होने पर ही कीमतों में राहत मिल सकती है। सरकार भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और उद्योगों से बातचीत की जा रही है।
फिलहाल युद्ध के असर से लकड़ी, लोहा-स्टील और डायग्नोस्टिक मशीनों की कीमतों में बढ़ोतरी ने बाजार में नई चिंता पैदा कर दी है। आने वाले दिनों में यह स्थिति अर्थव्यवस्था पर और व्यापक प्रभाव डाल सकती है।