पश्चिम एशिया में तनाव के बीच कच्चे तेल की क़ीमतों और आपूर्ति को लेकर बाज़ार सतर्क है। तेल की क़ीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत जैसे आयातक देशों पर पड़ता है।
Photo: Life Of Pix / Pexelsविश्लेषकों के अनुसार, भू-राजनीतिक अनिश्चितता के दौर में निवेशक सतर्क रहते हैं और बाज़ार में हलचल बढ़ जाती है। आपूर्ति बाधित होने की आशंका क़ीमतों को प्रभावित कर सकती है।
भारत अपनी ज़रूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की क़ीमतें महँगाई और चालू खाता घाटे जैसे संकेतकों से जुड़ी होती हैं। सरकार और कंपनियाँ स्थिति पर नज़र रखती हैं।
जानकारों का कहना है कि स्थिति सामान्य होने पर क़ीमतें स्थिर हो सकती हैं। फ़िलहाल बाज़ार सावधानी के साथ आगे बढ़ रहा है।









