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जयपुर समाचार: मोमोज स्टॉल लगाने वाली रेशू गुप्ता को अब भी इंसाफ का इंतजार, पुलिस की कार्रवाई पर सवाल

जयपुर के एक व्यस्त इलाके में मोमोज का स्टॉल लगाकर अपनी आजीविका चलाने वाली रेशू गुप्ता आज भी न्याय की आस में भटक रही हैं।

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Author: Jagraj Published: 28 Jun 2026, 2:53 PM Updated: 6 Jul 2026, 11:42 AM Views: 42
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जयपुर के एक व्यस्त इलाके में मोमोज का स्टॉल लगाकर अपनी आजीविका चलाने वाली रेशू गुप्ता आज भी न्याय की आस में भटक रही हैं। एक घटना जिसमें उन्हें कथित तौर पर निशाना बनाया गया था, के महीनों बीत जाने के बाद भी, उनकी शिकायत पर पुलिस की धीमी और अपर्याप्त कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला न केवल रेशू के व्यक्तिगत संघर्ष को उजागर करता है, बल्कि छोटे व्यवसायियों और हाशिए पर पड़े लोगों के लिए न्याय प्रणाली की पहुंच और प्रभावशीलता पर भी गंभीर चिंताएं पैदा करता है।

Photo: Aarti Krishnan / Pexels

घटना की शुरुआत कुछ महीने पहले हुई थी जब रेशू गुप्ता के मोमोज स्टॉल पर कुछ असामाजिक तत्वों ने कथित तौर पर हंगामा किया था। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, यह विवाद छोटी-मोटी कहासुनी से शुरू हुआ और जल्द ही मारपीट में बदल गया, जिसमें रेशू और उनके स्टॉल को नुकसान पहुंचाया गया। इस घटना ने आसपास के अन्य छोटे दुकानदारों और ठेले वालों में भय का माहौल पैदा कर दिया था, क्योंकि वे भी ऐसी ही असुरक्षा का सामना करते हैं।

रेशू ने तुरंत स्थानीय पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई थी। हालांकि, रेशू और उनके समर्थकों का आरोप है कि पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। शुरुआती जांच में देरी हुई और कथित तौर पर कुछ ही दिनों में मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। रेशू का कहना है कि उन्हें बार-बार पुलिस स्टेशन के चक्कर लगाने पड़े, लेकिन हर बार उन्हें टालमटोल भरे जवाब ही मिले।

Photo: Ajin K S / Pexels

इस मामले में पुलिस की निष्क्रियता पर विभिन्न नागरिक संगठनों और स्थानीय कार्यकर्ताओं ने भी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यह एक विशिष्ट पैटर्न का हिस्सा है जहां छोटे विक्रेताओं और कमजोर वर्गों की शिकायतों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि प्रभावशाली व्यक्तियों से जुड़े मामलों पर तेजी से कार्रवाई होती है। यह भेदभावपूर्ण रवैया न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है और आम जनता में पुलिस के प्रति अविश्वास पैदा करता है।

रेशू गुप्ता का मामला सिर्फ एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि यह उन हजारों रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे दुकानदारों की कहानी है जो शहरों में अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए संघर्ष करते हैं। उन्हें न केवल आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, बल्कि अक्सर उन्हें स्थानीय गुंडों, भ्रष्ट अधिकारियों और एक उदासीन व्यवस्था से भी जूझना पड़ता है। ऐसे में, जब उनके साथ अन्याय होता है, तो उन्हें न्याय मिलना और भी मुश्किल हो जाता है।

स्थानीय मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस मामले को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने की बात कही है। उनका मानना है कि जब तक पुलिस अपने रवैये में बदलाव नहीं लाएगी और सभी नागरिकों को समान रूप से न्याय सुनिश्चित नहीं करेगी, तब तक ऐसे मामले सामने आते रहेंगे। उन्होंने रेशू गुप्ता के लिए न्याय की मांग करते हुए एक अभियान शुरू करने की भी योजना बनाई है, ताकि इस मामले को फिर से उठाया जा सके और दोषियों को सजा मिल सके।

रेशू गुप्ता, जो अपनी मेहनत और लगन से अपना व्यवसाय चला रही थीं, अब एक ऐसी लड़ाई लड़ रही हैं जो उनके लिए व्यक्तिगत से कहीं बढ़कर है। यह लड़ाई उन सभी लोगों के लिए है जो व्यवस्था की उपेक्षा का शिकार होते हैं। उनकी उम्मीद है कि उनके संघर्ष से न केवल उन्हें न्याय मिलेगा, बल्कि भविष्य में अन्य लोगों को भी ऐसी परिस्थितियों से बचाया जा सकेगा।

इस घटना ने जयपुर शहर में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी सवाल खड़े किए हैं। यदि एक छोटे व्यवसायी को खुलेआम परेशान किया जाता है और पुलिस समय पर कार्रवाई करने में विफल रहती है, तो यह आम नागरिकों के बीच असुरक्षा की भावना को बढ़ा सकता है। यह दिखाता है कि पुलिस को न केवल अपराधों पर प्रतिक्रिया देने की आवश्यकता है, बल्कि सक्रिय रूप से कमजोर वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनके विश्वास को जीतने की भी आवश्यकता है।

रेशू गुप्ता का कहना है कि वह तब तक हार नहीं मानेंगी जब तक उन्हें न्याय नहीं मिल जाता। उनका दृढ़ संकल्प उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो अन्याय के खिलाफ लड़ने की हिम्मत रखते हैं। यह मामला एक महत्वपूर्ण अनुस्मारक है कि न्याय केवल शक्तिशाली लोगों के लिए नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज के हर वर्ग के लिए सुलभ और प्रभावी होना चाहिए।

इस बीच, स्थानीय प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से इस मामले पर स्पष्टीकरण की मांग की जा रही है। उम्मीद है कि जन दबाव और मीडिया कवरेज के बाद, इस मामले को फिर से खोला जाएगा और रेशू गुप्ता को आखिरकार वह न्याय मिल पाएगा जिसकी वह हकदार हैं। यह देखना होगा कि क्या पुलिस अपनी छवि सुधारने और छोटे व्यवसायियों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाने के लिए ठोस कदम उठाती है।

यह घटना एक चेतावनी भी है कि शहरी विकास के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा और न्याय प्रणाली की मजबूती भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि समाज के कमजोर तबके को न्याय नहीं मिलता है, तो यह पूरे सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करता है। रेशू गुप्ता का संघर्ष इस बात का प्रमाण है कि न्याय की लड़ाई अक्सर लंबी और कठिन होती है, लेकिन इसे लड़ा जाना आवश्यक है।

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Staff Reporter at VG Khabar.

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