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Chhattisgarh

“बैलगाड़ियों में निकली अनोखी बारात, विधायक शामिल”

“छत्तीसगढ़ में बैलगाड़ियों में सजी अनोखी बारात निकली, दूल्हे के साथ विधायक भी बने बाराती, दिखी ग्रामीण संस्कृति की झलक।”

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Author: Simran Published: 14 Mar 2026, 6:34 PM Updated: 5 Jul 2026, 10:57 PM Views: 102
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रायपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध ग्रामीण संस्कृति और परंपराओं की अनोखी झलक एक बार फिर देखने को मिली, जब एक गांव में दूल्हे की बारात बैलगाड़ियों में सजी और पूरे पारंपरिक अंदाज में निकली। इस खास मौके पर स्थानीय विधायक भी बारात में शामिल हुए और दूल्हे के साथ बैलगाड़ी में बैठकर बारात का हिस्सा बने।

इस अनोखी बारात ने न केवल गांव के लोगों का ध्यान आकर्षित किया, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी चर्चा का विषय बन गई। ग्रामीणों ने इसे अपनी सांस्कृतिक परंपराओं और लोक जीवन की पहचान बताया।

बैलगाड़ियों में निकली पारंपरिक बारात

आधुनिक समय में जहां शादियों में लग्जरी कारें और आधुनिक साधनों का उपयोग बढ़ गया है, वहीं इस गांव में पुरानी परंपरा को जीवित रखने के लिए बैलगाड़ियों में बारात निकाली गई

दूल्हे को सजाई गई बैलगाड़ी में बैठाकर पूरे गांव में जुलूस की तरह बारात निकाली गई। बैलगाड़ियों को रंग-बिरंगे कपड़ों, फूलों और पारंपरिक सजावट से सजाया गया था, जिससे पूरा दृश्य बेहद आकर्षक और सांस्कृतिक माहौल से भरपूर नजर आया।

विधायक भी बने बाराती

इस खास अवसर पर क्षेत्र के विधायक भी बारात में शामिल हुए। उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर बैलगाड़ी में बैठकर दूल्हे के साथ बारात का हिस्सा बनकर इस आयोजन को और खास बना दिया।

विधायक ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपराएं बेहद समृद्ध हैं और ऐसे आयोजनों से इन परंपराओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।

ग्रामीण संस्कृति की झलक

बारात के दौरान पारंपरिक संगीत, ढोल-नगाड़े और लोकगीतों की धुन पर ग्रामीण झूमते नजर आए। महिलाएं और युवा पारंपरिक वेशभूषा में इस आयोजन में शामिल हुए।

ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह के आयोजन से छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिलती है

युवाओं में बढ़ रही रुचि

इस अनोखी बारात को देखने के लिए आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। कई युवाओं ने इस आयोजन को मोबाइल कैमरों में कैद किया और सोशल मीडिया पर साझा किया।

युवाओं का कहना है कि आधुनिकता के दौर में भी अगर परंपराओं को जीवित रखा जाए, तो यह हमारी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है।

संस्कृति और परंपरा का संदेश

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आयोजन समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करते हैं।

बैलगाड़ी जैसी पारंपरिक चीजें आज भले ही कम उपयोग में हों, लेकिन वे ग्रामीण जीवन और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं। ऐसे आयोजनों से लोगों को अपनी परंपराओं पर गर्व करने का अवसर मिलता है।

गांव में उत्सव जैसा माहौल

बारात के दौरान पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सभी इस आयोजन का हिस्सा बने।

गांव की सड़कों पर सजावट की गई और लोगों ने बारात का स्वागत पारंपरिक तरीके से किया। इस आयोजन ने गांव में खुशी और उत्साह का माहौल बना दिया।

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Simran

Simran is a passionate journalist who reports on politics, public policy, and social issues. Her work focuses on delivering reliable news, in-depth insights, and timely updates to readers.

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