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कांग्रेस ने UCC को बताया हिंदुस्तान के लिए पेचीदा, लिव-इन कपल के बच्चों के अधिकारों पर भी होगा ड्राफ्ट में विचार

कांग्रेस पार्टी ने समान नागरिक संहिता (UCC) को भारत जैसे विविधतापूर्ण देश के लिए एक 'पेचीदा' और जटिल मुद्दा करार दिया है। पार्टी ने इस बा...

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Author: Jagraj Published: 28 Jun 2026, 2:52 PM Updated: 28 Jun 2026, 8:47 PM Views: 2
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कांग्रेस पार्टी ने समान नागरिक संहिता (UCC) को भारत जैसे विविधतापूर्ण देश के लिए एक 'पेचीदा' और जटिल मुद्दा करार दिया है। पार्टी ने इस बात पर जोर दिया है कि UCC का मसौदा तैयार करते समय देश की सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक बहुलता को ध्यान में रखना बेहद ज़रूरी है। यह बयान ऐसे समय आया है जब UCC को लेकर देश में बहस तेज़ हो गई है और सरकार इसके संभावित लागूकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है।

Photo: Héctor Berganza / Pexels

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कहा है कि UCC का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून बनाना है, लेकिन भारत जैसे देश में जहां विभिन्न धर्मों और समुदायों के अपने व्यक्तिगत कानून हैं, वहां इसे लागू करना आसान नहीं होगा। कांग्रेस का मानना है कि इस प्रक्रिया में सभी हितधारकों, विशेषकर धार्मिक और आदिवासी समुदायों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जाना चाहिए।

लिव-इन रिलेशनशिप और बच्चों के अधिकार

कांग्रेस ने UCC के प्रस्तावित ड्राफ्ट में लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा हुए बच्चों के अधिकारों को शामिल करने की संभावना पर भी अपनी चिंता और विचार व्यक्त किए हैं। पार्टी का कहना है कि यह एक महत्वपूर्ण पहलू है जिस पर सावधानीपूर्वक विचार करने की आवश्यकता है। वर्तमान में, लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा हुए बच्चों के अधिकार विभिन्न अदालती फैसलों और व्याख्याओं पर निर्भर करते हैं, और एक स्पष्ट कानूनी ढांचा अभी तक पूरी तरह से स्थापित नहीं है।

Photo: Daniel Miller / Pexels

UCC के तहत इन बच्चों को कानूनी वैधता और संपत्ति के अधिकारों सहित अन्य समान अधिकार प्रदान करने का प्रावधान एक बड़ा कदम हो सकता है। कांग्रेस ने इस बात पर प्रकाश डाला कि इस विषय पर कानून बनाते समय बच्चों के सर्वोत्तम हितों को सर्वोपरि रखा जाना चाहिए। पार्टी ने यह भी कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप की सामाजिक स्वीकार्यता और कानूनी स्थिति को भी ध्यान में रखना होगा।

UCC का मसौदा तैयार करने वाली समिति को इन संवेदनशील मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श करना होगा। कांग्रेस का मानना है कि किसी भी कानून को लागू करने से पहले उसके दूरगामी सामाजिक प्रभावों का आकलन करना अनिवार्य है। विशेष रूप से, विभिन्न धार्मिक और आदिवासी समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों पर UCC के प्रभाव को समझना महत्वपूर्ण है।

पार्टी ने यह भी तर्क दिया है कि UCC को केवल एक राजनीतिक एजेंडे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे देश के सभी नागरिकों के लिए न्याय और समानता सुनिश्चित करने के एक साधन के रूप में देखा जाना चाहिए। इसके लिए एक समावेशी और सहभागी दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।

कांग्रेस ने पहले भी UCC पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है कि वह सैद्धांतिक रूप से समान नागरिक संहिता का समर्थन करती है, लेकिन इसे लागू करने के तरीके और समय को लेकर उसके अपने आरक्षण हैं। पार्टी का मानना है कि जल्दबाजी में या बिना व्यापक सहमति के लागू किया गया UCC देश की सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचा सकता है।

विभिन्न धार्मिक नेताओं और नागरिक समाज संगठनों ने भी UCC के संभावित प्रभावों पर चिंता व्यक्त की है। कुछ का तर्क है कि यह अल्पसंख्यकों के अधिकारों का उल्लंघन कर सकता है, जबकि अन्य इसे लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय की दिशा में एक आवश्यक कदम मानते हैं।

कांग्रेस ने सरकार से आग्रह किया है कि वह UCC के मसौदे को सार्वजनिक करे और उस पर व्यापक बहस और चर्चा की अनुमति दे। पार्टी का मानना है कि पारदर्शिता और जनभागीदारी के बिना, UCC को सफल बनाना मुश्किल होगा।

इसके अलावा, पार्टी ने इस बात पर भी जोर दिया कि UCC को केवल विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे मुद्दों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे सभी व्यक्तिगत कानूनों के पहलुओं को शामिल करना चाहिए, ताकि वास्तव में एक समान संहिता बन सके।

आने वाले समय में, UCC पर बहस और तेज होने की संभावना है, और कांग्रेस की टिप्पणियां इस चर्चा में एक महत्वपूर्ण आयाम जोड़ती हैं। सरकार को सभी राजनीतिक दलों और हितधारकों की चिंताओं को दूर करते हुए एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना होगा।

यह देखना दिलचस्प होगा कि UCC का अंतिम मसौदा क्या रूप लेता है और क्या यह देश की विविधता को बनाए रखते हुए सभी नागरिकों के लिए समानता सुनिश्चित करने में सफल होता है। कांग्रेस का रुख यह स्पष्ट करता है कि इस प्रक्रिया में अभी कई चुनौतियों का सामना करना बाकी है।

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Jagraj

Staff Reporter at VG Khabar.

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