Sat, 20 Jun 2026 · भारत संस्करण
Breaking
सुप्रीम कोर्ट: महिला वकीलों के लिए बुनियादी सुविधाएं अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा के अधिकार से जुड़ीं राहुल गांधी के जन्मदिन पर थलपति विजय ने दी खास बधाई, स्टालिन के संदेश से 'ब्रदर' शब्द गायब राम मंदिर ट्रस्ट पर उठते सवालों के बीच, जानिए कौन हैं महासचिव चंपत राय? सड़कें जलमग्न, घरों में घुसा पानी...हावड़ा में बारिश से जीवन अस्त-व्यस्त, बंगाल में IMD का अलर्ट 4 इंच की 'नाचने वाली लड़की' के पीछे क्यों पड़ा पाकिस्तान, न देने पर अड़ा भारत पांच मौसमी प्रणालियों के कारण मानसून की प्रगति बाधित: 19 राज्यों में देरी की आशंका
Sat, 20 Jun 2026
Advertisement
Government

सुप्रीम कोर्ट: महिला वकीलों के लिए बुनियादी सुविधाएं अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा के अधिकार से जुड़ीं

The Supreme Court of India has declared that basic facilities for women lawyers are essential for their right to dignity under Article 21...

Fallback voice mode (browser TTS).

Author: Jagraj Published: 20 Jun 2026, 2:37 AM Updated: 20 Jun 2026, 5:18 AM Views: 11
X

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है, जिसमें कहा गया है कि महिला वकीलों के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा के अधिकार का एक अभिन्न अंग है। यह टिप्पणी एक याचिका की सुनवाई के दौरान की गई, जिसमें देश भर की अदालतों में महिला अधिवक्ताओं के लिए पर्याप्त सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया गया था।

Photo: Mark Stebnicki / Pexels

न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि एक गरिमापूर्ण वातावरण में काम करना प्रत्येक व्यक्ति का मौलिक अधिकार है, और इसमें कार्यस्थल पर आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच शामिल है। महिला वकीलों के लिए, विशेष रूप से शौचालय, विश्राम कक्ष और शिशु देखभाल सुविधाओं जैसी बुनियादी संरचनाओं की कमी उनके पेशेवर जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है और उनके गरिमापूर्ण अस्तित्व के अधिकार का उल्लंघन कर सकती है।

शीर्ष अदालत ने विभिन्न राज्य सरकारों और बार काउंसिलों को इस मामले की गंभीरता को समझने और इस दिशा में ठोस कदम उठाने का निर्देश दिया। न्यायालय ने कहा कि यह केवल सुविधा का मामला नहीं है, बल्कि न्याय तक पहुंच और कानूनी पेशे में लैंगिक समानता सुनिश्चित करने का भी एक महत्वपूर्ण पहलू है।

अदालत ने स्वीकार किया कि कई अदालती परिसरों में, विशेषकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में, महिला वकीलों के लिए सुविधाओं की स्थिति चिंताजनक है। इस स्थिति को सुधारने के लिए तत्काल ध्यान और संसाधनों के आवंटन की आवश्यकता है ताकि महिला अधिवक्ता बिना किसी बाधा के अपना काम कर सकें।

यह निर्णय महिला वकीलों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, और उम्मीद है कि यह देश भर की अदालतों में उनके लिए बेहतर कार्य वातावरण बनाने में मदद करेगा। यह टिप्पणी लैंगिक समानता और कार्यस्थल पर गरिमा के अधिकार को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि एक समावेशी और समान कानूनी प्रणाली के लिए सभी हितधारकों को मिलकर काम करना होगा। इसमें न्यायपालिका, कार्यपालिका और बार के सदस्य शामिल हैं, जिन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि महिला वकीलों को समान अवसर और सम्मान मिले।

इस मामले की अगली सुनवाई में, न्यायालय उम्मीद कर रहा है कि संबंधित प्राधिकरणों द्वारा उठाए गए कदमों पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उसके निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन किया जा रहा है।

J

Jagraj

Staff Reporter at VG Khabar.

Published: 205 | Total Views: 14773

View Profile