RAIPUR EDITION · 07.09.2026

ज़मीन से जुड़ी पत्रकारिता।
छत्तीसगढ़ की सबसे तेज़ लोकल न्यूज़ डेस्क — तथ्य पहले, शोर बाद में।

Breaking
वॉलीबॉल के ‘अकरम भैया’ को राज्य खेल अलंकरण, हजारों खिलाड़ियों को नई पहचान दिलाने का मिला सम्मान राज्य खेल अलंकरण समारोह 2026: 125 खिलाड़ियों का सम्मान, गुरुचरण सिंह होरा ने बढ़ाया हौसला रायपुर में विश्वभारती मारुति सुजुकी ड्राइविंग स्कूल शुरू, 10 वर्षीय जगराज ने सिम्युलेटर पर लिया ड्राइविंग अनुभव राष्ट्रीय खेल दिवस पर गुरुचरण सिंह होरा ने खिलाड़ियों को किया सलाम, बोले- साय सरकार में छत्तीसगढ़ की खेल प्रतिभाओं को नई उड़ान गुरुचरण सिंह होरा ने दी रक्षाबंधन की शुभकामनाएं, बोले- राखी रिश्तों और विश्वास का बंधन युवा और खेल शक्ति से बनेगा विकसित भारत: सांसद बृजमोहन अग्रवाल
Mon, 7 Sep 2026
VastuGuruji.com - Authentic Vastu Products & Consultation
Government

सुप्रीम कोर्ट: महिला वकीलों के लिए बुनियादी सुविधाएं अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा के अधिकार से जुड़ीं

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है, जिसमें कहा गया है कि महिला वकीलों के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता संविधान के…

इस खबर की वेब स्टोरी देखें
अक्षर आकार

Fallback voice mode (browser TTS).

Author: Jagraj Published: 20 Jun 2026, 2:37 AM Updated: 20 Jun 2026, 2:37 AM Views: 53
X

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है, जिसमें कहा गया है कि महिला वकीलों के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा के अधिकार का एक अभिन्न अंग है। यह टिप्पणी एक याचिका की सुनवाई के दौरान की गई, जिसमें देश भर की अदालतों में महिला अधिवक्ताओं के लिए पर्याप्त सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया गया था।

Photo: Mark Stebnicki / Pexels

न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि एक गरिमापूर्ण वातावरण में काम करना प्रत्येक व्यक्ति का मौलिक अधिकार है, और इसमें कार्यस्थल पर आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच शामिल है। महिला वकीलों के लिए, विशेष रूप से शौचालय, विश्राम कक्ष और शिशु देखभाल सुविधाओं जैसी बुनियादी संरचनाओं की कमी उनके पेशेवर जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है और उनके गरिमापूर्ण अस्तित्व के अधिकार का उल्लंघन कर सकती है।

शीर्ष अदालत ने विभिन्न राज्य सरकारों और बार काउंसिलों को इस मामले की गंभीरता को समझने और इस दिशा में ठोस कदम उठाने का निर्देश दिया। न्यायालय ने कहा कि यह केवल सुविधा का मामला नहीं है, बल्कि न्याय तक पहुंच और कानूनी पेशे में लैंगिक समानता सुनिश्चित करने का भी एक महत्वपूर्ण पहलू है।

अदालत ने स्वीकार किया कि कई अदालती परिसरों में, विशेषकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में, महिला वकीलों के लिए सुविधाओं की स्थिति चिंताजनक है। इस स्थिति को सुधारने के लिए तत्काल ध्यान और संसाधनों के आवंटन की आवश्यकता है ताकि महिला अधिवक्ता बिना किसी बाधा के अपना काम कर सकें।

यह निर्णय महिला वकीलों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, और उम्मीद है कि यह देश भर की अदालतों में उनके लिए बेहतर कार्य वातावरण बनाने में मदद करेगा। यह टिप्पणी लैंगिक समानता और कार्यस्थल पर गरिमा के अधिकार को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि एक समावेशी और समान कानूनी प्रणाली के लिए सभी हितधारकों को मिलकर काम करना होगा। इसमें न्यायपालिका, कार्यपालिका और बार के सदस्य शामिल हैं, जिन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि महिला वकीलों को समान अवसर और सम्मान मिले।

इस मामले की अगली सुनवाई में, न्यायालय उम्मीद कर रहा है कि संबंधित प्राधिकरणों द्वारा उठाए गए कदमों पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उसके निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन किया जा रहा है।

Sponsored · VastuGuruji

ख़रीदें — आपके लिए चुनिंदा वास्तु उपाय

J

Jagraj

Staff Reporter at VG Khabar.

Published: 432 | Total Views: 25357

View Profile